सीताफल मंडी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो व्यापारियों का माल जब्त; प्रतिबंध के बीच बाजार में कैसे पहुंचा फल?
छपारा मंडी में सुबह पहुंची वन विभाग की टीम, वनक्षेत्रों से सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध; जंबो सीताफल की गुणवत्ता बचाने के लिए कच्चे फल नहीं तोड़ने की अपील
छपारा सीताफल मंडी में कार्रवाई, दो व्यापारियों का माल जब्त, सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध, कच्चे फल तोड़ने पर चेतावनी
Seoni, 11 October 2026
सिवनी यशो:- जिले में प्रसिद्ध जंबो सीताफल के संग्रहण और बिक्री को लेकर वन विभाग की कार्रवाई के बाद छपारा की सीताफल मंडी में हलचल मच गई। वनक्षेत्रों से सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में फल पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने रविवार सुबह छपारा मंडी में कार्रवाई करते हुए दो व्यापारियों का सीताफल जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान छपारा वन परिक्षेत्र अधिकारी स्वाति सिन्हा सहित वन विभाग का अमला मौजूद रहा।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वनक्षेत्रों से सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में फल पहुंचने और व्यापारियों द्वारा इसकी खरीदी किए जाने की सूचना विभाग को मिली थी। इसके बाद टीम मंडी पहुंची और दो व्यापारियों के पास मौजूद सीताफल जब्त किया। हालांकि, जब्त किए गए फल की मात्रा, संबंधित व्यापारियों के नाम और आगे की वैधानिक कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
वनक्षेत्रों में सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध
उत्तर सिवनी वनमंडल के वनक्षेत्रों में सीताफल संग्रहण को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, संबंधित वनक्षेत्रों को अक्टूबर 2026 तक सीताफल संग्रहण के लिए निषिद्ध घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य वनक्षेत्रों की जैवविविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।
आदेश में मध्यप्रदेश वन उपज (जैवविविधता का संरक्षण और पोषण कटाई) नियम, 2005 के नियम 3, 4 एवं 5 का उल्लेख किया गया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
ऐसे में मंडी में सीताफल की आवक को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि फल कहां से लाया गया था और क्या उसका संग्रहण प्रतिबंधित वनक्षेत्रों से किया गया था। इसकी पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
कच्चे फल तोड़ने से जंबो सीताफल की गुणवत्ता पर असर
दूसरी ओर, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने भी सिवनी जंबो सीताफल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों, उत्पादकों और व्यापारियों से कच्चे फलों की तुड़ाई एवं बिक्री से बचने की अपील की है।
जिला उद्यानिकी अधिकारी डॉ. आशा उपवंशी वासेवार के अनुसार, अपरिपक्व अवस्था में सीताफल तोड़ने से उसका स्वाद, मिठास और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कच्चे तोड़े गए फल सामान्य रूप से अच्छी तरह नहीं पकते और कई बार काले होकर सूखने लगते हैं। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित होने के साथ स्थानीय उत्पादकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कैसे पहचानें पकने के लिए तैयार सीताफल?
उद्यानिकी विभाग के अनुसार, सीताफल की परिपक्वता पहचानने के लिए कुछ संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:
- कलिकाओं के बीच दूरी बढ़ना: फल की सतह पर बनी कलिकाओं या आंखों के बीच अंतर बढ़ने लगता है।
- रंग में बदलाव: गहरे हरे रंग की जगह फल हल्का हरा, पीला या सफेद दिखाई देने लगता है।
- सही समय पर तुड़ाई: परिपक्वता के संकेत मिलने के बाद ही फल तोड़ें, ताकि उसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
जंबो सीताफल की पहचान और किसानों के हित का सवाल
जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग सिवनी के जंबो सीताफल को जिले की विशिष्ट पहचान बताते हुए इसकी गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। उपलब्ध विभागीय जानकारी में इसे ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) और जीआई टैग से जुड़ी पहचान वाला उत्पाद बताया गया है।
वन विभाग की कार्रवाई जहां प्रतिबंधित वनक्षेत्रों से संग्रहण रोकने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी है, वहीं उद्यानिकी विभाग की अपील कच्चे फल की तुड़ाई रोककर उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने पर केंद्रित है।
अब मंडी में जब्त किए गए सीताफल के स्रोत, मात्रा और संबंधित व्यापारियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई को लेकर विभागीय जानकारी का इंतजार है। जांच से स्पष्ट होगा कि जब्त माल प्रतिबंधित वनक्षेत्रों से संग्रहित किया गया था या नहीं।
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