अब दुनिया पहचानेगी सिवनी का स्वाद: जम्बो सीताफल को मिला GI टैग
भूतबंधानी के सीताफल का बढ़ा मान, GI टैग ने दिलाई नई पहचान
सिवनी जम्बो सीताफल को GI Tag मिला किसानों को मिलेगा बेहतर दाम और वैश्विक पहचान
Seoni 22 June 2026
सिवनी यशो:- सिवनी जिले के लिए गौरव और हर्ष का विषय है कि जिले के प्रसिद्ध सिवनी जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि जिले की विशिष्ट कृषि पहचान, किसानों की मेहनत और उद्यानिकी क्षेत्र के निरंतर प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।
जीआई टैग मिलने से अब सिवनी जम्बो सीताफल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलेगी तथा किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ेगी।

बड़े आकार और विशिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध है सिवनी जम्बो सीताफल
सिवनी जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार, उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्राकृतिक रूप से विकसित होने वाले विशेष मीठे स्वाद के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। इस सीताफल का औसत वजन 200 से 650 ग्राम प्रति फल होता है, जबकि जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई फल 800 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं।
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जीआई टैग मिलने से इस विशिष्ट उत्पाद की पहचान सुरक्षित रहेगी और इसके नाम का अनधिकृत उपयोग अन्य क्षेत्रों में नहीं किया जा सकेगा।
वर्ष 2023 में किया गया था आवेदन
सहायक संचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने बताया कि उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा कलेक्टर सिवनी एवं आयुक्त उद्यानिकी के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था। लंबे प्रयासों के बाद सिवनी जम्बो सीताफल को यह महत्वपूर्ण मान्यता प्राप्त हुई है।

हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
जीआई टैग मिलने से जिले के हजारों सीताफल उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। अब सिवनी में उत्पादित सीताफल को उसकी विशिष्ट पहचान के साथ बाजार में प्रस्तुत किया जा सकेगा और अन्य क्षेत्रों के उत्पादक इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्पाद की मांग और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि होगी। साथ ही सीताफल उत्पादन, क्षेत्र विस्तार और प्रसंस्करण गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
695 हेक्टेयर में होती है सीताफल की खेती
वर्तमान में सिवनी जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती की जा रही है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 6090 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है।
जिले का सीताफल देश के प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर, वाराणसी सहित अन्य बाजारों में विशेष मांग रखता है।
प्रसंस्करण उद्योग को भी मिलेगा बढ़ावा
सीताफल का उपयोग पल्प निर्माण में किया जाता है, जिससे आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी, शेक और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का उत्पादन किया जाता है। इसके अलावा सीताफल के पत्तों और छिलकों का उपयोग जैविक खाद तथा औषधीय उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है।
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जिले में सीताफल उत्पादकों को संगठित करने के लिए दो एफपीओ (FPO) का गठन किया गया है तथा तीन सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाइयाँ भी स्थापित की जा चुकी हैं।
कलेक्टर ने दी बधाई
कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना, जिला उद्यानिकी अधिकारी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार तथा जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग ने इस उपलब्धि पर जिले के किसानों, उद्यानिकी विशेषज्ञों एवं सभी संबंधित हितधारकों को बधाई दी है।
कलेक्टर ने विश्वास व्यक्त किया कि जीआई टैग के माध्यम से सिवनी जम्बो सीताफल को देश और विदेश के बाजारों में नई पहचान मिलेगी तथा इससे जिले के किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिवनी की कृषि विरासत को सशक्त बनाने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



