सिवनी नगर पालिका लीज विवाद: पहले विरोध, अब समर्थन – करोड़ों के खेल का खुलासा!
सदर कॉम्प्लेक्स मामला गरमाया, पहले विरोध करने वाले पार्षद अब सवालों में; सत्ता दबाव में पास हुआ प्रस्ताव
सिवनी में सिवनी नगर पालिका लीज विवाद अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। सदर कॉम्प्लेक्स के लीज नामांतरण को लेकर उठे सवालों ने पूरे नगर में चर्चा तेज कर दी है।
इस सिवनी नगर पालिका लीज विवाद में आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे परिषद को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
सिवनी नगर पालिका लीज विवाद
Seoni 28 March 2026
सिवनी यशो:- सिवनी नगर पालिका परिषद में सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। आरोप है कि ज्ञानचंद सनोडिया के नेतृत्व में नियमों को दरकिनार कर ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनसे अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सिवनी नगर पालिका लीज विवाद भाजपा के लिये गले की हड्डी बन सकता है और परिषद के जिम्मेदार नियम विरूद्ध कार्यवाही के आरोप में कई नप सकते है
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पार्षदों की आपत्ति भी नहीं सुनी गई
इस प्रस्ताव पर कई पार्षदों ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई थी और इसे नियम विरुद्ध बताते हुए नगर हित के खिलाफ बताया था, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया गया।
सत्ता के दबाव में पास हुआ प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, इस संवेदनशील मुद्दे पर पहले भी कई निर्वाचित अध्यक्षों ने हाथ डालने से परहेज किया था, लेकिन वर्तमान में संगठन की कड़ी आपत्ति के बाद विशेष सम्मेलन स्थागित कर दिया गया और चंद दिनों बाद पुन: सम्मेलन आयोजित कर सत्ता के दबाव में प्रस्ताव को पास कराया गया।
यह सम्मेलन अब नगर पालिका के इतिहास में एक विवादित और शर्मनाक भ्रष्ट निर्णय लेने वाले सम्मेलन के रूप में देखा जा रहा है।
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करोड़ों के नुकसान का खेल? बदलते रुख पर सवाल
सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण से नगर पालिका परिषद को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि अवैध कब्जाधारियों से दुकानें वापस लेकर नई नीलामी कराई जाए, तो परिषद को करोड़ों रुपये का लाभ हो सकता है।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा के ही पार्षद राजेश “राजू” यादव और संजय भलावी ने पूर्व में (जब नगरपालिका में कांग्रेस अध्यक्षीय परिषद थी) अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी।
उन्होंने परिषद से यह भी मांग की थी कि:
- अवैध कब्जाधारियों को दुकानें खाली करने के नोटिस दिए जाएं
- किराया वसूली की जाए
- लीज नवीनीकरण नहीं कराने के कारण स्पष्ट किए जाएं
उनकी मांग पर अवैध कब्जाधारियों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
लेकिन अब वही पार्षद इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं या रुख बदलते नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
आरोप यह भी लग रहे हैं कि अवैध कब्जाधारी दुकानदारों से लाभान्वित होकर नगर हित को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे परिषद को करोड़ों का नुकसान हो सकता है और आरक्षित वर्ग के अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने उठाया मामला, शिकायत भोपाल तक
कांग्रेस पार्षद दल ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन से लेकर भोपाल और जबलपुर तक कर दी है और जांच की मांग की है।
सिवनी नगर पालिका लीज विवाद – कानूनी कार्रवाई की आशंका
यदि नियम विरुद्ध लीज नामांतरण आगे बढ़ता है, तो यह मामला आपराधिक प्रकरण में बदल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी स्तर पर भी इसको लेकर असहजता बनी हुई है।
जनता पूछ रही—किसके दबाव में फैसला?
अब बड़ा सवाल यही है कि पार्षदों की आपत्ति, संगठन की नाराजगी और पुराने रुख के बावजूद आखिर किस दबाव में यह निर्णय लिया गया?
आगे क्या?
सिवनी नगर पालिका लीज विवाद अब सत्ताधारी दल के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है।
यदि लीज नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है।
सिवनी नगर पालिका लीज विवाद मामले से जुड़े और बड़े खुलासे—अगले अंक में।





