स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय लखनादौन गंदगी और अव्यवस्था की गिरफ्त में
कॉलेज परिसर में कचरा, बदबू और टूटे शौचालय, छात्रों की सेहत और पढ़ाई दोनों पर असर
लखनादौन यशो:- लखनादौन स्थित स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय इन दिनों
शिक्षा के केंद्र के बजाय गंदगी, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही
का उदाहरण बनता जा रहा है। कॉलेज परिसर में प्रवेश करते ही चारों ओर फैला कचरा,
दुर्गंध, टूटी नालियां और बदहाल व्यवस्था साफ दिखाई देती है।
कक्षाओं के बाहर, गलियारों, सीढ़ियों, शौचालयों के पास और मैदान में
गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे छात्रों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दीवारों और सीढ़ियों पर गुटखा थूक, स्वच्छता अभियान पर सवाल
कॉलेज की दीवारों और सीढ़ियों पर जगह-जगह पान-गुटखा थूक के दाग
दिखाई देते हैं। कई स्थानों पर गुटखा-पान के पैकेट और प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है।
इससे न केवल महाविद्यालय की छवि खराब हो रही है,
बल्कि विद्यार्थियों में गलत आदतों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों की
यह स्थिति खुली अवहेलना मानी जा रही है।
छात्रों की शिकायतें अनसुनी, सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप
छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार कॉलेज प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया,
लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है।
शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि छात्र-छात्राएं
उनका उपयोग करने से बचते हैं।
कई जगह दरवाजे टूटे हुए हैं, पानी की सुविधा नहीं है
और बदबू के कारण वहां जाना मुश्किल हो गया है।
बरसात में हालात और बदतर, बीमारियों का खतरा बढ़ा
पीने के पानी के आसपास भी गंदगी फैली हुई है,
जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
बरसात के मौसम में परिसर में जगह-जगह पानी भर जाता है,
कीचड़ फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों की आशंका लगातार बनी हुई है।
कई छात्रों ने बीमार पड़ने की बात भी कही है।
शिक्षा का माहौल प्रभावित, प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग
गंदगी और अव्यवस्था के कारण पढ़ाई का माहौल बुरी तरह प्रभावित
हो रहा है। छात्र मानसिक तनाव के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि
यह क्षेत्र का प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है,
लेकिन आज उसी शिक्षा के मंदिर की स्थिति शर्मनाक हो चुकी है।
लोगों ने मांग की है कि कॉलेज में
नियमित सफाई कर्मियों की नियुक्ति की जाए,
दीवारों और सीढ़ियों की विशेष सफाई कराई जाए,
परिसर में पान-गुटखा पर सख्त प्रतिबंध लगे,
शौचालयों की मरम्मत और पानी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए,
तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब सवाल यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद कॉलेज प्रबंधन कब जागेगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेंगे,
या छात्र यूं ही गंदगी, बदबू और बीमारी के खतरे के बीच पढ़ने को मजबूर रहेंगे?
जनता और छात्रों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



