रेलवे के लिए भीख क्यों मांगे मंडला? राजनीतिक नाकामी का नतीजा है रेलवे संघर्ष
आदिवासी जिला फिर सड़क पर — क्या विकास सिर्फ़ चुनावी भाषणों तक सीमित है?
रेलवे के लिए भीख क्यों मांगे मंडला? राजनीतिक नाकामी का नतीजा है रेलवे संघर्ष
आदिवासी जिला फिर सड़क पर — क्या विकास सिर्फ़ चुनावी भाषणों तक सीमित है?
Mandla 09 February 2026
मंडला यशो:- मंडला रेलवे संघर्ष अब सिर्फ़ रेल लाइन की मांग नहीं,
बल्कि जिले की जनता द्वारा वर्षों से झेली जा रही राजनीतिक उपेक्षा का खुला आरोप है।
एक आदिवासी बहुल जिले को अगर आज भी रेल, इलाज और रोज़गार के लिए आंदोलन करना पड़े,
तो सवाल जनता से नहीं, सत्ता में बैठे नेताओं से पूछा जाना चाहिए।

रेलवे स्टेशन पर धरना या नेताओं की नाकामी का प्रदर्शन?
राष्ट्रीय ब्रॉडगेज रेलवे संघर्ष समिति द्वारा स्टेशन परिसर में दिया गया सांकेतिक धरना
दरअसल उस विकास के खोखले दावों पर करारा तमाचा है,
जिनका इस्तेमाल हर चुनाव में वोट मांगने के लिए किया जाता है।
मंडला फोर्ट से रेल संचालन, पीट लाइन और कोचिंग डिपो जैसी बुनियादी मांगें
दशकों से फाइलों में धूल खा रही हैं।

जबलपुर–नागपुर–दिल्ली से क्यों नहीं जुड़ा मंडला?
मंडला रेलवे संघर्ष का सबसे बड़ा सवाल यही है —
जब मध्यप्रदेश के कई जिले रेल नेटवर्क से चमक रहे हैं,
तो आदिवासी बहुल मंडला को अब तक महानगरों से सीधे क्यों नहीं जोड़ा गया?
क्या यह केवल भूगोल की मजबूरी है या राजनीतिक इच्छाशक्ति की भारी कमी?
गरीब पर महंगा सफर, नेताओं पर सस्ता भाषण
आज मंडला से नागपुर या रायपुर जाने पर बस और निजी वाहनों से
400 रुपये से अधिक खर्च करना पड़ता है।
मरीज, मजदूर और छात्र इस बोझ को रोज़ उठाते हैं,
जबकि सत्ता पक्ष के लिए विकास सिर्फ़ मंचों तक सिमटा रह जाता है।
सीधी रेल सेवा शुरू हो तो किराया आधा होगा —
लेकिन क्या यह बात कभी सत्ता के एजेंडे में आई?

सर्वे हुए, घोषणाएं हुईं… जमीन पर रेल क्यों नहीं?
रेल मंत्रालय द्वारा पेंड्रा–गोटेगांव, डिंडोरी–मंडला–जबलपुर–घंसौर मार्ग को लेकर
कई सर्वे कराए गए, लेकिन नतीजा हमेशा शून्य रहा।
यह सवाल अब तेज़ हो रहा है कि —
क्या मंडला केवल सर्वे रिपोर्टों का कब्रिस्तान बनकर रह गया है?
समाज एकजुट, राजनीति खामोश?
सिंधी समाज, चौरसिया समाज और व्यापारिक संगठनों का खुला समर्थन
यह साबित करता है कि मंडला रेलवे संघर्ष किसी दल का नहीं,
बल्कि जनता का आंदोलन बन चुका है।
सवाल यह है कि —
जब समाज खड़ा है, तो राजनीति अब भी चुप क्यों है?
जनता का अल्टीमेटम: रेल दो या जवाब दो
अनूप मिश्रा, अनूप बासल, सत्यनारायण अग्रवाल, चंद्र मोहन सराफ,
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक मर्सकोले, विधायक नारायण पट्टा सहित
आंदोलन से जुड़े लोगों ने साफ कहा है कि —
अब सिर्फ़ आश्वासन नहीं, समयबद्ध रेल योजना चाहिए।
मंडला की जनता अब यह पूछ रही है —
रेलवे संघर्ष उनकी मजबूरी है या नेताओं की विफलता का सबूत?



