जक़ात सिर्फ मदद नहीं, आत्मनिर्भरता की राह है: आज लेने वाला कल देने वाला बने
जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुति में वक्ताओं का संदेश, एक साल में 46 लाख से अधिक की जक़ात से 101 लोगों को मिला रोजगार
Seoni 27 January 2026
सिवनी यशो:- जक़ात का मतलब केवल फकीरों को चंद रुपये थमा देना नहीं है, बल्कि जक़ात का वास्तविक उद्देश्य यह है कि लेने वाला व्यक्ति आत्मनिर्भर बने और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करे।
हमारी कोशिश होनी चाहिए कि जो आज जक़ात ले रहा है, वह कल जक़ात देने वाला बने। यदि किसी की मदद से उसकी जिंदगी बदल रही है, तो जक़ात के माध्यम से यह नेक काम हम सब मिलकर कर सकते हैं।

जक़ात इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो दिल को दौलत की मोहब्बत और लालच से पाक करता है तथा आत्मा की शुद्धता का माध्यम है।
उक्त विचार रॉयल लॉन, सिवनी में आयोजित जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुति के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किए।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अज़ीज़ खान, जक़ात सेंटर इंडिया के ऑल इंडिया सेक्रेटरी अब्दुल जब्बार सिद्दीकी, शहर काज़ी हाफिज़ अनीस सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी की वर्ष 2025–26 की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
जक़ात केवल मदद नहीं, ज़िंदगी बदलने का प्रयास
वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शाजिब फलाही ने बताया कि जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी पिछले एक वर्ष से समाज के गरीब, कमजोर और बेसहारा वर्ग को सहारा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था केवल इमदाद तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की जिंदगी में स्थायी बदलाव लाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों की मदद की जाती है,
उनकी गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है,
इसी कारण न तो फोटो खिंचवाई जाती है और न ही सोशल मीडिया पर प्रचार किया जाता है।
सर्वे के बाद दी जाती है जरूरत के अनुसार मदद
जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी के अध्यक्ष डॉ. सैय्यद शमशुल हसन ने बताया कि-
संस्था के पास आने वाले आवेदनों पर एक सर्वे टीम जरूरतमंदों तक पहुंचकर उनकी परिस्थितियों का बारीकी से आकलन करती है।
सर्वे के बाद आवश्यकता के अनुसार मदद दी जाती है और समय-समय पर मॉनिटरिंग भी की जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में लाभार्थी की इज़्ज़त, वक़ार और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
एक साल में 46 लाख से अधिक की जक़ात, 101 लोगों को मिला रोजगार
जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी की स्थापना को अभी केवल एक वर्ष हुआ है।
इस अवधि में संस्था को 46 लाख 20 हजार 250 रुपये जक़ात के रूप में प्राप्त हुए,
जिनमें से 41 लाख 17 हजार 204 रुपये जरूरतमंदों पर खर्च किए गए।
इस राशि से 101 लोगों को स्वरोजगार के लिए सहायता दी गई, जिनमें शामिल हैं—
ऑटो रिक्शा, फल-सब्जी ठेले, कपड़ा व्यवसाय, किराना दुकान, चाय दुकान, जूते-चप्पल, दर्जी कार्य,
कॉस्मेटिक, खिलौने, सिलाई केंद्र, स्क्रैप,
फैब्रिकेशन, बिरयानी होटल, एंबुलेंस, टैक्सी, रेडियम आर्ट, आटा चक्की, बेकरी, डायपर दुकान,
अंडे की दुकान, स्टेशनरी, टिफिन सेवा, डिलीवरी बाइक, स्कूल कैंटीन,
पोल्ट्री, स्पेयर पार्ट्स व बाइक वर्कशॉप सहित अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
29 विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग
शिक्षा को समाज की बेहतरी का आधार बताते हुए संस्था द्वारा 29 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शिक्षा में सहायता की गई।
इनमें
BHMS, B-Pharmacy, B-Tech, PG, डिप्लोमा छात्राएं, 22 छात्रवृत्तियां तथा कोचिंग सहायता शामिल है।
इस मद में लगभग 2 लाख 53 हजार 54 रुपये की सहायता दी गई।
44 परिवारों को नियमित पेंशन
जक़ात सेंटर इंडिया यूनिट सिवनी द्वारा 44 गरीब परिवारों के 90 लाभार्थियों को कुल 5 लाख 62 हजार 500 रुपये की सहायता दी गई।
प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह 1000 रुपये की पेंशन दी जा रही है।
जक़ात अल्लाह की अमानत है : डॉ. शमशुल हसन
डॉ. सैय्यद शमशुल हसन ने कहा कि –
जक़ात सेंटर किसी की निजी संपत्ति नहीं बल्कि अल्लाह की अमानत है।
इसे सँभालने वाले मालिक नहीं,
बल्कि जिम्मेदार हैं।
समाज के सक्षम लोगों से उन्होंने अपील की कि-
उनके भरोसे और सहयोग से ही यह नेक कार्य संभव हो पा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन अतहर खान ने किया,
जबकि अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया।



