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*भारतवर्ष धर्म भूमि है भारत के प्राण का स्वरूप धर्म है* – स्वामी श्री प्रज्ञानानंद*

*भारतवर्ष धर्म भूमि है भारत के प्राण का स्वरूप धर्म है*
* स्वामी श्री प्रज्ञानानंद*

24 मार्च 2023
सिवनी यशो:- भारत धर्म भूमि है धर्म हमारे संस्कारों में है भारत ही दुनिया में ऐसा देश है जिसे धर्मभूमि कहा जाता है । यज्ञ परमात्मा से जोडऩे का माध्यम है! धर्म और विवेक की दृष्टि से ही सद और असद की , पहचान होती है! भगवान और भगवती- भोग तथा ऐश्वर्य दोनों प्रदान करते हैं! यज्ञ भूमि में आया हुआ प्रत्येक व्यक्ति यज्ञ का स्वरूप है !
उक्त आशय के प्रेरक प्रवचन पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर दंडी स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती जी के मुखारविंद से शुक्रवार को श्री शक्ति महायज्ञ के तीसरे दिन, यज्ञ भूमि मठ मंदिर सिवनी की धर्म सभा में प्रवाहित हुए! प्रवचन पंडाल में उपस्थित धर्म प्रेमी जन मेदिनी एवं यज्ञ के यजमान गणों को संबोधित करते हुए स्वामी श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि, भारतवर्ष धर्म भूमि है, विश्व के अन्य क्षेत्र सिर्फ भोग भूमि है! भारत में जो भी कार्य होते हैं वह सभी धर्म पर आधारित होते हैं! धर्म तथा अधर्म का स्वरूप भारत में ही देखा और पहचाना जाता है! इस भूमि के प्राण का स्वरूप धर्म है! धर्म ही व्यक्ति को चैतन्य और शाश्वत बनाता है!
स्वामी श्री ने कहा कि, महाभारत युद्ध में धर्म से विमुख हुए अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर वास्तविक धर्म उपदेश दिया था! अर्जुन के पास सांसारिक चर्म चक्षु तो थे जिनसे वह भगवान को देख तो रहा था किंतु पहचान नहीं पाया था !
स्वामी जी ने श्रीमद भगवद् गीता के श्लोक का आध्यात्मिक विवेचन करते हुए कहा कि देखने तथा दर्शन करना अलग अलग बात है! जब अर्जुन भगवान के शरणागत हुआ तब श्रीकृष्ण ने उसे, दिव्य दृष्टि देकर अपने विराट स्वरूप से परिचित कराया!
श्री विद्या के परम उपासक स्वामी श्री ने प्रवचन माला को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, भगवती तथा पूज्य *गुरुदेव ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य महाराज श्री* की कृपा और आशीर्वाद स्वरूप, 7 दिनों के अल्प समय में इस महायज्ञ की भूमिका बनी है !तथा भगवती सिवनी के धर्म नगरी में स्वयं विराजमान हुई है! यहां विगत 3 दिनों से देवी अर्चना के साथ पुराण पारायण, धर्म सम्मत विधि विधान से चल रहा है! भगवती की प्रेरणा से सहज रूप में यजमान गण स्वयं आए हैं! विश्व शांति और कल्याण की भावना से आयोजित इस महायज्ञ में जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की दीनताऔर हीनता दूर होगी यह यज्ञ फल कहां जाता है !
पूज्य स्वामी श्री के प्रवचन पूर्व विद्वान आचार्य पं.श्री सनत कुमार उपाध्याय जी ने श्री शक्ति महायज्ञ की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि, जिस तरह से स्नान करने से शरीर की शुद्धि, ज्ञान से आत्मा की शुद्धि, होती है !इसी तरह दान से धन की शुद्धि हो जाती है! आचार्य जी ने बताया कि आगामी 30 मार्च तक इस महायज्ञ की यज्ञशाला में प्रात: 8:00 बजे से 10:00 बजे तक यजमान गणों द्वारा स्थापित देवी देवताओं का पूजन अर्चन, 10:00 बजे से 12:00 बजे तक श्री सूक्त से यज्ञ आहुतियां, तथा मध्यान्ह विश्राम के पश्चात ,पुन: यज्ञ आहुतियां जारी रहेंगी! *प्रतिदिन 4:30 बजे से पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती जी के प्रवचन होंगे* आरती तथा प्रसाद वितरण होगा! आयोजन समिति द्वारा समस्त श्रद्धालु जनों से नवरात्र के इस पावन पर्व पर यज्ञ दर्शन, परिक्रमा, तथा प्रवचन श्रवण का पुण्य लाभ अर्जित करने विनम्र आग्रह किया गया है !

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