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सात धान्यों, पंचामृत व 108 मटकियों से श्री राधा-कृष्ण विग्रह का स्नानाधिवास संपन्न

राधा कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा, विग्रह स्नानाधिवास, समारोह में वैदिक विधियों का भव्य आयोजन

सिवनी में राधा कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा, विग्रह स्नानाधिवास,

Seoni 24 February 2026
सिवनी यशो:- नगर के प्रवेश द्वार पर नव-निर्मित श्री द्वारकाधीश राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा, भागवत कथा एवं यज्ञ समारोह के अंतर्गत गुरुवार को विग्रहों के अन्नाधिवास, स्नानाधिवास की शास्त्रीय विधियां विधिवत संपन्न हुईं।
सात प्रकार के धान्यों से अन्नाधिवास उपरांत सर्व औषधियां, पंचपल्लव, पंचगव्य, पंचामृत, षडरस एवं अन्य रसों को 108 मटकियों में भरकर भगवान श्री राधा-कृष्ण के विग्रहों का अभिषेक कर स्नानाधिवास कराया गया। रात्रि में शयनाधिवास की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

सिवनी में श्री द्वारकाधीश राधा कृष्ण मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सात धान्य और पंचामृत से विग्रह स्नानाधिवास
सिवनी में श्री द्वारकाधीश राधा-कृष्ण मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान 108 मटकियों से विग्रहों का स्नानाधिवास।

चारों वेदों की ऋचाओं से पूर्ण हुआ विग्रह अधिवास

द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज की विशेष रुचि से आयोजित इस समारोह में विग्रह अधिवास की समस्त वैदिक विधियां आचार्य श्री सनत कुमार जी उपाध्याय के मार्गदर्शन में संपन्न कराई गईं।
चारों वेदों की ऋचाओं के मंत्रोच्चार से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा।

भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में ज्ञान और भक्ति का संदेश

भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के कृपापात्र शिष्य ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने कहा कि
“अज्ञानता रूपी रोग को केवल गुरु के ज्ञान से ही दूर किया जा सकता है, जैसे शुकदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित का उद्धार किया।”

सिवनी में श्री द्वारकाधीश राधा कृष्ण मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सात धान्य और पंचामृत से विग्रह स्नानाधिवास
सिवनी में श्री द्वारकाधीश राधा-कृष्ण मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान 108 मटकियों से विग्रहों का स्नानाधिवास।

नरसिंह अवतार प्रसंग में महामोह पर प्रहार

कथा में भगवान नरसिंह अवतार का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद जिज्ञासु साधक थे, जबकि हिरण्यकश्यपु महामोह का प्रतीक था। मोह ही समस्त व्याधियों का मूल है।
भगवान ने चार वेदों के चार महावाक्य—
प्रज्ञानं ब्रह्म, अहं ब्रह्मास्मि, तत् त्वम् असि, अयम् आत्मा ब्रह्म—
प्रमाण रूपी नाखूनों से महामोह रूपी हिरण्यकश्यपु का वध कर भक्त की रक्षा की।

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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
“जय कन्हैया लाल की… नंद के आनंद भयो” की धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।
श्री द्वारकाधीश सत्संग भवन को विशेष रूप से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन-बधाइयां गाईं, खिलौने व उपहार लुटाए गए तथा सौठ के लड्डू और हलवा प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।

रात्रि में होगा शयनाधिवास

कार्यक्रम के अंत में बताया गया कि रात्रि काल में भगवान श्री राधा-कृष्ण विग्रहों का शयनाधिवास विधिवत संपन्न कराया जाएगा।

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