Seoni 27 October 2025
सिवनी यशो:- शनि मंदिर पलारी टेकरी एवं सूर्य मंदिर पावर हाउस शनिधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में 30 अक्टूबर को आंवला नवमी उत्सव का आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के साथ किया जा रहा है।
यह पर्व प्रकृति, परिवार और धर्म की एकता का प्रतीक माना जाता है।

🌸 धार्मिक अनुष्ठान और परंपरा
इस दिन श्रद्धालु आंवले (आवला) वृक्ष के नीचे लड्डू गोपालजी और शालिग्राम की स्थापना कर पूजन, दीपदान और भोग लगाते हैं।
इसके पश्चात परिवारजन उसी वृक्ष के नीचे भोजन ग्रहण करते हैं, जो धर्मलाभ और पुण्यफल की प्राप्ति का प्रतीक माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन आंवला वृक्ष के नीचे भगवान विष्णुजी और शालिग्राम की पूजा करने से आरोग्य, संतति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
🌿 विशेष परंपरा: इस दिन कुम्हड़ा (कद्दू) का दान करना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।
🌿 आंवला नवमी पर्व की विशेषताएँ
- शनिधाम पलारी टेकरी में भक्तिमय आयोजन
- आंवले के वृक्ष के नीचे गोपालजी एवं शालिग्राम की पूजा-अर्चना
- दीपदान, भोग एवं सपरिवार भोजन की परंपरा
- दान, धर्म और स्वास्थ्य लाभ का महत्व
🌞 आंवला नवमी के धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ
१. विष्णु और लक्ष्मी की कृपा:
आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। पूजा से विष्णुजी और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
२. अक्षय फल की प्राप्ति:
इस दिन किए गए पुण्यकर्म और दान का फल कभी समाप्त नहीं होता।
३. सुख-समृद्धि और धन वृद्धि:
व्रत-पूजन से घर में लक्ष्मी का वास होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
४. आरोग्य लाभ:
आंवले के पूजन से शरीर में रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
५. पापों का नाश:
इस दिन के पूजन, व्रत और दान से सभी पाप नष्ट होते हैं।
🌺 सार
आंवला नवमी पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।
इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा से मानसिक शांति, आरोग्य, और समग्र जीवन में संतुलन प्राप्त होता है।
शनिधाम पलारी टेकरी में हो रहा यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत अवसर है —
जहाँ आस्था, संस्कृति और पर्यावरण प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।



