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अपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं – प्रज्ञानानंद

संस्कार और धर्म की रक्षा के लिये पंडित जानकी बल्लभ मिश्रा का सरायनीय योगदान – स्वामी प्रज्ञानानंद

गीता परिवार में 18 बटुकों का हुआ उपनयन संस्कार

    सिवनी 29 मार्च 2023 – भारतीय संंस्कृति संस्कारों के कारण समृद्ध और सतत है हमारे यहाँ संस्कारों की प्रधानता है बच्चों को संस्कार गर्भ दिये जाते है । जो माता पिता अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे पाते वे माता पिता कहलाने के अधिकारी नहीं है संतति उत्पन्न तो पशु पक्षी भी करते है परंतु हम मनुष्य है संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी चलते जाते है संतान पैदा करना और उसे संस्कारवान बनाना आसान काम नहीं है । संतान का पालन पोषण और संस्कारवान बनाने के लिये माता पिता को बहुत त्याग करना पड़ता है । यह होता है देवभूमि भारत में पश्चात देशों में इस प्रकार के संस्कारों को कोई स्थान नहीं है वहाँ विवाह जैसे पवित्र संस्कारों को कांटेक्ट माना जाता है जबकि हमारे यहाँ यह पवित्र संस्कार होता है ।

 

अपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं - प्रज्ञानानंद - Seoni News
इस आशय के प्रवचन पूज्य दण्डी स्वामी महामंडलेश्वर प्रज्ञानानंद जी महाराज ने राजश्री पैलेश में आयोजित हुये ब्राह्मण बालको के उपनयन संस्कार के अवसर पर आर्शीवाद देते हुये उपस्थित जनसमुदाय को धर्म का मर्म समझाते हुये सुनाये और कहा कि हमारे यहाँ जो संस्कार है वह धर्म को व्यवस्थित रूप देने की विधि है । मनुष्य जन्म का उद्देश्य मोक्ष होता है यह शरीर मोक्ष का माध्यम है और व्यापार व्यवहार जीवन की यात्रा के साधन है । हमारे यहाँ प्रत्येक संस्कार धर्म के लिये है उपनयन संस्कार परात्मा के निकट पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करने का संस्कार है ।

 

अपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं - प्रज्ञानानंद - Seoni Newsअपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं - प्रज्ञानानंद - Seoni News
आज यहाँ जो उपनयन संस्कार हो रहा है वह ब्राह्मण बालको का दूसरा जन्म है आज से यह बटुक द्विज हो जायेगे। वेद शास्त्र और धार्मिक कार्यो का विधि विधान से संपन्न कराने के लिये समाज में धार्मिक विचारों का विस्तार करेंगे ।
स्वामी प्रज्ञानानंद जी ने कहा कि जिले के लिये यह सौभाग्य का विषय है कि पंडित जानकी बल्लभ मिश्रा लगातार ब्राह्मण बालको को संस्कार और धर्म की शिक्षा दे रहे है औरब्राह्मणत्व को पुष्ट करने के निरंतर प्रयास किये जा रहे है । पं. जानकी बल्लभ मिश्रा ब्राह्मण बालाको को कर्मकांड एवं वेद शास्त्रों की शिक्षा देकर उन्हें संस्कारित कराने का पवित्र किया जा रहा है इसके साथ ही समाज के हर वर्ग को गीता का व्यवस्थित अध्ययन कराया जा रहा है धर्म और संस्कारों की रक्षा के लिये पंडित जानकी बल्लभ मिश्रा का सराहनीय योगदान है ।

 

अपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं - प्रज्ञानानंद - Seoni News
पंडित जानकी बल्लभ मिश्र ने सभी बटुको को दीक्षा दी एवं विद्यारंभ संस्कार का शुभारंभ किया । कार्यक्रम पूर्ण विधि विधान से सुबह 06 बजे पंडित भूपेन्द्र तिवारी एवं शरद शर्मा के आचार्यत्व में प्रारंभ हुये पंडित रविकांत पांडे संजय मिश्रा ने व्यवस्थाओं को संचालित किया कार्यक्रम के संयोजक नरेन्द्र टांक ने सारी व्यवस्थाओं को अपनी टीम के साथ कुशलता पूर्वक संचालित किया ।

 

 

अपने बच्चे को जो संस्कार नही दे सकते उन्हें माता पिता कहलाने का अधिकार नहीं - प्रज्ञानानंद - Seoni News
शुक्रवार को राजश्री पैलेश में 18 बटुको का उपनयन संस्कार संपन्न हुआ यह सभी बटुक वैदिक रीति से कर्मकांड की विधियों की शिक्षा प्राप्त कर रहे है । उपनयन संस्कार में मौनी बाबा आश्रम के संत बलबंता नंद जी महाराज,ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. ओमप्रकाश तिवारी, पं. सनत कुमार उपाध्यक्ष भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक दुबे, कांग्रेस के अध्यक्ष राजकुमार खुराना,जिला पंचायत उपाध्यक्ष लल्लू बघेल, भाजपा उपाध्यक्ष आनंद शर्मा,पूर्व नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, विवेकानंद बालकल्याण समिति के व्यवस्थापक नितिन चौधरी, प्रशंत शुक्ला, नरेद्र ठाकुर, रमेश चातक, श्री नरेेन्द्र मिश्रा, पार्षद राजेश यादव, नगर के गणमान्य नागरिक सभी बटुको के माता पिता उनके परिजन, गुरू परिवार के सभी छात्र और बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

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