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निर्बल के बल राम- ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूपजी*

सिवनी 12 अप्रैल 2023
सिवनी यशो:- श्री हरि विष्णु ने अन्य देवताओं रक्षा की, मनुष्यों का उद्धार किया, दैत्यों की रक्षा की, ओर तो ओर पशु योनि में भी रक्षा की।
उक्ताशय प्रवचन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के चरणानुरागी शिष्य गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी ने स्मृति लान में चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कही, कथा प्रसंग में आज श्री कृष्ण का जन्म था अत: कथा पंडाल में भव्य सजावट की गई थी वासुदेव और बालक श्री कृष्ण की जीवंत झांकी बनाई गई बधाईयां गाई गयी, साथ ही कथा प्रसंग में गजेंद्र प्रसंग की कथा सुनाते हुए ब्रह्मचारी जी ने बताया की क्षीर सागर में एक त्रिकूट नाम का पर्वत है, उसके नीचे वरुण देव का उद्यान जैसा सुन्दर स्थान है वहाँ पर अनेक पशु, पक्षी आदि सब रहते थे, वहाँ का वातावरण बड़ा ही मनमोहक था, वहाँ हाँथीयों का सरदार गजेंद्र अपने अनेक बच्चों, हथनियाँ के साथ रहता था, क्रीड़ा, विहार करता था एक समय जब विहार करते करते जब उसको प्यास लगी तो एक सरोवर के किनारे गया। वहाँ जाकर उसने जल पिया ओर वहीं पत्नी बच्चों के साथ जलविहार और क्रीड़ा करने लगा जल उनके ऊपर डालने लगा। अब उसे यह पता नही था कि जिस सरोवर में हम जलविहार, क्रीड़ा कर रहे है, वहीं मेरी मौत के रूप में मगर मुझे देख रहा है मगर देखा कि जल विहार में मस्त हाँथी आसावधान है तो उसने जाकर गजेंद्र का पैर पकड़ लिया पकड़ कर खींचने लगा अब गजेंद्र वलशाली तो था एक हजार हाँथीयों का बल उसमें था लेकिन जल में हाथी की ताकत थोड़ी कम हो जाती है तो दोनों मे युद्ध छिड़ गया। कभी मगर गजेंद्र को नीचे खींच कर ले जाय कभी गजेंद्र मगर को ऊपर ले आता ये खींचा तानी चलती रही, उसी समय उसकी हथनिया ओर बच्चो ने भी गजेंद्र को छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन ताकतबर मगर भी बड़ा जोर लगा रखा था। छोड़ ही नही रहा था, अब हथीनियाँ बच्चे डाली, पत्ते डालने लगे । खायो ताकतबर बनो ओर लड़ो। लड़ते, लड़ते कई दिन बीत गये, हथिनियों ओर बच्चों ने सोचा अब ये आने वाला नहीं है तो सब छोड़कर चले गए। उसके बाद उसने बहुत जोर लगाया पर बाहर नही आ पाया। अब अंत में मगर उसे बहुत गहरे पानी में ले गया। खींचते-खींचते सब डूबता-डूबता अब सूंड बस रही स्वांस लेने के लिए। अंत में उसने देखा की अब कुछ नही है तो भगवान का स्मरण किया, गजेंद्र सुन्दर स्तुति की प्रार्थना में भगवान को पुकारा तो निर्गुण निराकार कि सगुण साकार वाला कोई नहीं आया, ब्रह्मा आदि जितने देवता कोई नही आया गजेंद्र को बचाने अंत में उसने सर्वात्मा श्री हरि विष्णु की प्रार्थना की हैं तो वे तुरंत ही प्रकट हो गए, प्रकट होकर प्रभु ने सुदर्शन चक्र से उस ग्राह (मगर)का मस्तक काट दिया। गजेंद्र को खींच कर बाहर ले आये ओर इस प्रकार उस गजेंद्र का उद्धार किया। भगवान वैकुंठ में थे वहाँ से गजेंद्र ने भगवान को पुकारा हरि इतना बोला तो कहते हैं आये आधे नाम…..सुने री मैने निर्बल के बल राम…. भगवान आधे नाम में आ गए। वो ‘ह’ बोला उतनी देर में भगवान आ गये। आकर गजेंद्र का उद्धार करके जब वैकुंठ जाने लगे तब ‘री’ शब्द सुनाई दिया। पहले भगवान क्यों नही आये बचाने। क्योंकि उसको अपने बल का अभिमान था। में बच जाऊंगा बहुत बल लगाया मगर वो नहीं छूटा जब निर्बल हो गया तब जो सब बलों का बल जो राम है। उनको पुकारा हरि को तब भगवान आये। ओर गजेंद्र का उद्धार किया। जो सब जगह से हार जाता है। हारे को हरि नाम जब कोई आपकी रक्षा न करे कोई आपका साथ न दे तब परमात्मा की शरण ग्रहण करनी चाहिए।

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