फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव से तालाब की लीज, पूर्व सचिव को 7 साल और ठेकेदार को 5 साल की सजा
मेहराखापा पंचायत में वर्ष 2014 का फर्जीवाड़ा; लाखों की मछली निकालने का आरोप, पूर्व सरपंच साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त
मेहराखापा पंचायत फर्जीवाड़ा: पूर्व सचिव को 7 साल, ठेकेदार को 5 साल की सजा
सिवनी यशो:- ग्राम पंचायत मेहराखापा में वर्ष 2014 में सामने आए फर्जीवाड़े के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय सिवनी के न्यायाधीश लक्ष्मण कुमार वर्मा ने ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव संतोष कुमार को फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में 7 वर्ष के सश्रम कारावास और ठेकेदार सफीउल्ला खान को धोखाधड़ी एवं फर्जी दस्तावेज के उपयोग के मामले में 5 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है।
मामले में तत्कालीन सरपंच कमला अहाके को साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। एक अन्य आरोपी हबीउल्ला खान की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी।
खाली जगह में लिखा गया था कथित फर्जी प्रस्ताव
अभियोजन के अनुसार मामला जनपद पंचायत सिवनी के अंतर्गत ग्राम पंचायत मेहराखापा और थाना कान्हीवाड़ा क्षेत्र का है। वर्ष 2014 में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मोहनलाल डेहरिया ने थाना कान्हीवाड़ा में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया था कि ग्राम पंचायत के आधिपत्य वाले खसरा क्रमांक 253 की करीब 5 एकड़ भूमि में स्थित तालाब में मछली पालन एवं मछली पकड़ने का ठेका देने के लिए 15 अगस्त 2014 को ग्रामसभा आयोजित हुई थी। अभियोजन के मुताबिक ग्रामसभा में आठ प्रस्ताव पारित हुए थे, लेकिन तालाब को लीज पर देने संबंधी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था।
आरोप था कि इसके बाद तत्कालीन सचिव संतोष कुमार ने ग्रामसभा रजिस्टर में खाली स्थान पर नौवां फर्जी प्रस्ताव दर्ज कर दिया और इसी के आधार पर तालाब का ठेका सफीउल्ला खान एवं हबीउल्ला खान को दे दिया गया।
पुराने दिनांक का अनुबंध बनाकर लिया गया लाभ
अभियोजन के मुताबिक ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच और सचिव द्वारा ठेकेदारों के साथ पूर्व दिनांक का अनुबंध भी तैयार किया गया, जबकि कथित अनुबंध की तारीख के समय संबंधित व्यक्ति उन पदों पर नहीं थे।
इसी अनुबंध एवं कथित फर्जी लीज दस्तावेज के आधार पर ठेकेदारों ने मत्स्य विभाग से अनुमति प्राप्त की और तालाब से बड़ी मात्रा में मछली निकाली। अभियोजन ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया से आरोपियों को अवैध आर्थिक लाभ हुआ और ग्राम पंचायत को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची।
न्यायालय में चली लंबी सुनवाई
पुलिस ने मामले की जांच के बाद तत्कालीन सचिव संतोष कुमार, तत्कालीन सरपंच कमला अहाके तथा ठेकेदार सफीउल्ला खान एवं हबीउल्ला खान के विरुद्ध संबंधित धाराओं में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान आरोपी हबीउल्ला खान की मृत्यु हो गई।
मामले में शासन की ओर से एजीपी नेतराम चौरसिया एवं वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी लोकेश कुमार घोरमारे ने गवाहों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
सचिव को 7 साल, ठेकेदार को 5 साल की सजा
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी संतोष कुमार पिता फकीर लाल कुमरे निवासी मेहराखापा को धारा 467/120-बी भादंवि के तहत 7 वर्ष तथा धारा 468 भादंवि के तहत 5 वर्ष के कारावास एवं कुल 4 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं आरोपी सफीउल्ला खान पिता हबीबुल्ला खान निवासी मेहराखापा को धारा 420/120-बी भादंवि के तहत 5 वर्ष तथा धारा 471 भादंवि के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 3 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालय का यह फैसला 25 अगस्त 2026 को सुनाया गया।
तालाब के ठेके से शुरू हुआ मामला पहुंचा अदालत तक
मेहराखापा के एक तालाब को लेकर ग्रामसभा के प्रस्ताव से शुरू हुआ यह मामला करीब 12 वर्ष बाद अदालत के फैसले तक पहुंचा। मामले में फर्जी प्रस्ताव और दस्तावेज के आधार पर पंचायत की संपत्ति के उपयोग तथा उससे हुए कथित आर्थिक नुकसान को अभियोजन ने गंभीरता से न्यायालय के समक्ष रखा, जिसके बाद दोषी पाए गए आरोपियों को सजा सुनाई गई।
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