भागवत कथा से परमात्मा के दर्शन के दिव्य चक्षु प्राप्त होते है – स्वामी प्रज्ञानानंद
सिवनी यशो:- श्रीमद भागवत गुरूतत्व तत्व है यह व्यक्ति को सदविचारों में चलने की प्रेरणा देती है श्रेष्ठ मार्ग कल्याण की ओर जाने का मार्गदर्शन देती है । भागवत कथा परमात्मा तक पहुंँचाने का सरल साधन है । भागवत कथा की श्रेष्ठतम शिक्षा सदगुरू से प्राप्त होती है जन्मों जन्मो की जो पाप की वृत्ति है उसे सद्गुरू दूर करते है मोक्ष की चाह रखने वाले को सदगुरू की शरण में जाना पड़ता है । उक्त उद्गार ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती जी महाराज के परम प्रिय शिष्य महामंडलेश्वर दंडी स्वामी प्रज्ञानानंद जी महाराज ने राजश्री पैलेस में भागवत कथा की ज्ञान गंगा का प्रवाह करते हुये कहे । उन्होंने कहा कि सदगुरू सभी प्रकार की दीक्षाएँ देते है मंत्र दीक्षा के साथ दुष्टि दीक्षा, स्पर्श दीक्षा देता है उसके प्रति हमारा समर्पण आवश्यक है । सदगति के लिये सूत्र तो एक ही काफी है परंतु श्रीमद भागवत कथा अलग अलग चरित्रों के माध्यम से व्यक्ति के मन को निर्मल करने का भाव होता है परमात्मा के प्रति आपकी लगन बढ़े आप परमात्मा के हो जाये श्रीमद भागवत कथा एक दिव्य दृष्टि देती है जो सांसारिक ताप को नष्ट करती है और उस दिव्य चक्षु से परमात्मा के दर्शन की शक्ति प्राप्ति होती है ।
स्वामी जी ने भागवत कथा की पवित्र गंगा का प्रवाह करते हुये कहा कि ज्ञान रूपी अग्रि में माया रूपी जल पड़ता है अग्रि ज्वनशीलता प्रभावित होती है ऐसे ही संगती की प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता है अच्छे व्यक्तियों का साथ हमारे जीवन को सुधार सकता है और बुरे लोगों की संगती हमारे जीवन को तबाह कर सकता है । महाराजश्री ने कहा कि हमारा मन है इसको भौतिक संसार में लगा हुआ है इसे निकालकर परमात्मा के चरणों में लगना है। उन्होंने गोपियों एवं कृष्ण की सुंदर लीनाओं का वर्णन करते हुये बताया कि गोपियों को भगवान को पाने की कामना थी उनके मन को श्रीचरणों का अनुरागी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया । गोपियों की सारी सांसारिक पीढ़ाओं को चुरा लिया । श्रीकृष्ण की सुंदर बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन, गोपियों के साथ रास का आध्यात्मिक वर्णन किया कुष्ण एवं माता यशोदा संवाद, कंश का वध की कथा के साथ श्रीकृष्ण विवाह का की कथा सुनायी है ।
गीता मनीषी पंडित जानकी बल्लभ मिश्रा एवं नरेन्द्र टांक का सम्मान
इस आयोजन में पहुँचे ब्राह्मण बालाको को वैदिक शिक्षा दीक्षा देने वाले गीता मनीषी पंडित जानकी बल्लभ मिश्रा का पूज्य श्री के सानिध्य में सम्मान किया । मंच पर ही गीता परिवार की ओर से गीता परिवार के परम स्नेही सहयोगी राजश्री पैलेस के संचालक नरेन्द्र
टांक का सम्मान किया गया । पूज्य दण्डी स्वामी ने पंडित जानकी बल्ला के द्वारा जिले में पिछले 33 वर्षो से चलाये जा रहे वैदिक शिक्षण के कार्य की मुक्तकंठ से प्रसंशा करते हुये कहा कि श्री मिश्रा जी के द्वारा जो शिक्षा और दीक्षा का कार्य किया जा रहा है वह जिले को प्रकाश देने के साथ देश के अनेक हिस्सों को आलोकित करेगा ।



