धर्ममध्यप्रदेशसिवनी

मातृधाम मंदिर का 28 वां पाटोत्सव

वैशाख शुक्ल दशमीं” दिनांक 18 मई 2024 शनिवार को सिवनी यशो:- सिवनी से 12 किमी दूर छिंदवाड़ा रोड स्थित मातृधाम शक्तिपीठ जहां सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्माचार्य भगवत्पूज्यपाद धर्मसम्राट् अनंतश्री विभूषित ज्योतिष् एवं द्वारका-शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने जन्मदात्री माता पूज्यनीय श्री गिरिजा देवी के पावन जन्म स्थान में परमराध्या भगवती श्रीमाता ललितेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के साथ अपनी मां को प्रतिष्ठित कर पूरे विश्व को *”मातृदेवोभव”* का महान सनातनी संदेश दिया। “न मातु: परदैवतम्” मां से बढ़कर कोई देवता नहीं। मां के ऋण से कोई भी मुक्त हो सकता। माता ही सर्वत्र वंदनीय है यह दिव्य भाव को महिमा मंडित करता मातृधाम शक्तिपीठ सनातनियों के लिए धार्मिक आस्था और विश्वास का महान केंद्र है। जहां माता की महिमा को देखकर मन मंत्रमुग्ध हो जाता है।

     पूरे भारत से इस शक्तिपीठ में सनातन का आना-जाना निरंतर चलते रहता है। समय-समय पर विविध धार्मिक आयोजन अनुष्ठान संपन्न होते रहते हैं। उक्त जानकारी देते हुये धर्मवीर अजित गौरीशंकर तिवारी ने बताया कि इस वर्ष भी परम पूज्य गुरुदेव भगवान धर्मसम्राट् श्री जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज के शुभाशीर्वाद से मातृधाम मंदिर का 28 वां पाटोत्सव समारोह धूमधाम से मनाया जायेगा। आज के दिन वैशाख शुक्ल दशमी के दिन 17 मई 1997 को पूज्यपाद महाराजश्री ने अपनी जन्मदात्री माता श्रीगिरिजा देवी के पावन जन्म स्थान में सिद्धिदात्री परमाराध्य भगवती श्रीमाता ललितेश्वरी त्रिपुर सुंदरी महारानी, दस महाविद्यायें, बटुकभैरव, नवग्रह, श्री अंबिकेश्वर महादेव, श्री ललितेश्वर महादेव एवं इष्टसिद्धि हनुमान जी महाराज की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। इसी स्थापना दिवस को प्रति वर्ष पाटोत्सव के रूप में मनाया जाता है। *हर वर्ष इस वर्ष यह पाटोत्सव 18 मई 2024 दिन शनिवार को प्रात: 10 बजे से मनाया जायेगा। श्री तिवारी ने बताया कि प्रात: कालीन भगवती का विशेष पूजन सहस्त्रार्चन एवं भगवान भूतभावन श्री ललितेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक एवं इष्टसिद्धि हनुमान जी महाराज का पूजन-अर्चन किया जावेगा। इस अवसर पर भजन जस एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है। मध्याह्न में महाप्रसाद का वितरण भी मंदिर परिसर में किया जावेगा। अत: आप से आग्रह है की आप इस पुनीत अवसर पर उपस्थित हो एवं पुण्य लाभ अर्जित करने अनुरोध किया गया है।

 

ब्राह्मणों को वेदों का अध्ययन, ब्राह्मणत्व अनुकूल नियमों का पालन करना चाहये – शंकराचार्य

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