सिवनी यशो:- कृष्ण चोरों का सरदार है, जो परब्रह्म परमात्मा है, यह सब के पाप भी चुरा लेता है दुखों को चुरा लेता है संकटों को पीड़ा को सबको चुरा लेता है अज्ञान को चुरा लेता है । सांसर का एक मात्र चोर है जिसकी चोरी मंगलकारी होती है और इससे सारे अनिष्ठ मिट जाते है ।
उक्ताशय के प्रवचन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परम कृपापात्र शिष्य ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने सरेखा में चल रही श्रीमद भागवत कथा में दिए, ब्रह्मचारी जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की जो मंगलमय चोरी की लीला है इसका श्रवण करने से क्या होता है संसार में किसी चोर की कहानी सुनो तो उससे कुछ होता है या नहीं चोरी करना गलत बात है और आप उसे चोर की कहानी सुन रहे हैं यह एकमात्र चोर है, संसार में जिसकी कथा सुनने से पुण्य होता है जो भगवान की चोरी की लीला का श्रवण करता है तो उसके पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं सामान्य चोर तो आपकी धन संपत्ति आदि की चोरी करेगा पर यह जो चोरों का सरदार है, जो परब्रह्म परमात्मा है, यह सब के पाप भी चुरा लेता है दुखों को चुरा लेता है संकटों को पीड़ा को सबको चुरा लेता है अज्ञान को चुरा लेता है ऐसा यह चोरों का सरदार है ।
महाराज श्री ने कथा को आगे बढ़ते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का उद्धार किया और साथ ही परम पद प्रदान किया, भगवान तो करुणा निधान है! भगवान ने जो माता के लिए स्थान रिजर्व कर रखा था वह स्थान उन्होंने पूतना को दे दिया, माता को जो गति मिलनी चाहिए वह पूतना को दे दी ऐसे दयालू श्री कृष्ण को छोड़कर हम किसकी शरण में जाएं। भगवान श्री कृष्ण के अद्भुत कर्मों को, पूतना वध के प्रसंग को सुनता है श्रवण करता है, उसकी गोविंद में रति हो जाती है। भगवान श्री कृष्ण से उसका प्रेम हो जाता है, भगवान के प्रति श्रद्धा बढ़ जाती है इसीलिए निरंतर इस पूतना मोक्ष प्रसंग को सुनना चाहिए ।
पूज्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी ने बताया कि भगवान की लीलाएं समझना कठिन है। भगवान की लीला में ब्रह्मा जी इंद्र आदि देवता भी मोहित हो जाते हैं, एक बार श्री कृष्णा ग्वालवालों के साथ भोजन कर रहे थे तब एक दूसरे को झूठ का खिला रहे थे। ब्रह्मा जी ने देखा कि भगवान झूठा खा रहे हैं खिला रहे हैं, कैसे परमात्मा है क्या बात उन्हें जमी नहीं ब्रह्मा जी ने ग्वाल वालों का अपहरण कर गुफा में छुपा दिया। भगवान को जब पता चला कि ब्रह्मा जी ने ग्वालवालों को उठा लिया है, तो भगवान ही सभी रूपों में प्रकट हो गए स्वयं ही ग्वालबाल बन गए, छड़ी बन गए, कंबल बन गए, बछड़े बन गए। 1 साल तक यही लीला चलती रही ब्रह्मा जी ने जब जाकर देखा तो बे चकित हो गए। जहां उन्होंने छुपाया था वहाँ भी नजर आए भगवान की शरण में जाने पर पता चला कि सब कुछ कृष्णामय है ।



