कुदरत सबके साथ समान व्यवहार करती हैं

यहाँ कोई छोटा या बड़ा नहीं है, कुदरत की नज़र में सब समान है। प्रकृति सबके साथ एक समान व्यवहार करती है, चाहे कोई पापी हो या पुण्य आत्मा ,क़ुदरत को इससे कोई मतलब नहीं है। यदि बारिश हो रही है, तो पापी के खेत में भी उतनी ही होगी जितनी कि पुण्य आत्मा व्यक्ति के खेत में, कोई फर्क नहीं है। क़ुदरत फर्क करना जानती ही नहीं। इसी प्रकार क़ुदरत या कहें परमात्मा को धर्मो से भी कोई लेना देना नहीं है। व्यक्ति किसी भी धर्म का हो वह सबके साथ समान व्यवहार करता है। उसे हमारे धर्म से भी कोई मतलब नहीं है, और हम धर्मो के जाल में फँसें है। अपने धर्म को बड़ा और दूसरे के धर्म को छोटा समझ रहें है। सच्चा धार्मिक व्यक्ति सभी धर्मो का समान रूप से आदर करता है, और यदि कोई दूसरों के धर्म का अनादर करता है, तो समझना चाहिए कि वह अपने धर्म का भी आदर नहीं करता है। ऐसा व्यक्ति धर्म के नाम पर पाखंण्ड करता है, वह पाखण्डी है, धार्मिक तो बिलकुल भी नही।
परमात्मा किसी को कम या ज़्यादा नहीं देता है, बस उसके देने के तरीक़ो में भेद हो सकता है, पर देता तो समान ही है, वह अति न्यायप्रिय है। भूल व्यक्ति से हो सकती है, परमात्मा से नहीं। वह दे रहा हो , और हम ले ही न, वह बरस रहा हो और यदि कोई अपने पात्र को ही उल्टा कर दे, तो वह उल्टे पात्र में न दे सकेगा , उल्टा पात्र न भर सकेगा । पात्र को उल्टा रखना है या सीधा , यह हम पर निर्भर है। उल्टा पात्र भरेगा नहीं, और हम तो सदैव ही पात्र को उल्टा लिए हुए है, पात्र को कभी सीधा पकड़ा ही नहीं, और फिर दोष परमात्मा पर लगाएं कि उसने हमारे पात्र को खाली ही रखा , तो इसमें उसका कोई दोष नहीं है। समझ होनी चाहिए कि उल्टे पात्र को भरा नहीं जा सकता । पात्र सीधा होगा , तो ही भर सकेगा । उत्तरदायित्व हमारा ही है, और हम उसे जिम्मेदार ठहराते है, इससे कोई लाभ न होगा। आंख खोलनी होगी, बेहोशी तोड़नी होगी, होश जगाना होगा।
संकलन
अनुराग अग्रवाल
Astrologer, Numerologist & Vastu Expert
जय श्रीकृष्ण





