नई दिल्ली :- लोकसभा चुनाव समाप्त हो गये अब राजनैतिक दल चुनाव मिले परिणाम की समीक्षा में जुटे है । भाजपा के लिये इस बार की जीत बहुत फीकी रही । भाजपा जिस प्रकार की उम्मीद कर रही थी परिणाम वैसे नहीं आने से भाजपा का केन्दी्रय नेतृत्व मायूस है । पूरे देश भर में चुनाव पूर्व बने माहौल से भारतीय जनता पार्टी गदगद रही है । उसे उम्मीद थी कि भाजपा की सीटों मेंं इजाफा होगा और भाजपा ने अबकी बार 400 पार का नारा भी दिया था । भले ही नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बन गयी हो परंतु सीटे कम होने से भाजपा के अंदर वह खुशी नहीं है । प्राप्त नतीजों पर राज्यवार बीजेपी लगातार मंथन कर रही है। और स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का परफॉर्मेंस बेहद निराशाजनक रहा है । दावा 80 में से 80 सीटो का था और माना जा रहा था कि 70 – 75 सीटे निश्चित रूप से बीजेपी की झोली में आयेंगी और यह अनुमान राजनैतिक विश£ेषक भी लगा रहे थे परंतु जब परिणाम आये तो 80 में महज 33 सीटें मिलीं। जबकि सपा को भाजपा से अधिक 37 सीटें मिली और कांग्रेस ने भी छह सीटों पर जीत दर्ज की। नतीजों में बीजेपी को जो बड़ा झटका लगा है । उसका दर्द प्रदेश नेतृत्व से असंतुष्ट नेता और असफल हुये कार्यकत्र्ता और अधिक बढ़ा रहे है । सबसे अधिक आश्चर्य इस बात है कि अयोध्या सीट पर भाजपा को हार मिली । यहाँ की हार से भाजपा की बेजा किरकिरी भी हो रही है ।
यूपी में बीजेपी के इस प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और यूपी के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के बीच बैठक भी हुई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में भूपेंद्र चौधरी ने खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी ली है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष तय कर लिया है और यूपी को जो नये प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाले है वह यूपी प्रदेश की प्रदेश कार्यकारणी में भी कुछ बदलाव करने की शक्तियों के साथ प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालेंगे । राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ दिल्ली में हुई बैठक में कई प्रदेश पदाधिकारियों के साथ कुछ विधायक भी मौजूद थे। हालांकि यूपी प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की जो सुगबुगाहट है वह कितनी सच है यह अधिकृत एलान होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा । संभावना तो यह भी बतायी गयी है इसकी अधिकृत घोषणा जून माह में ही हो सकती है ।





