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6 सितम्बर को हरितालिका व्रत अत्यंत शुंभ योगो से युक्त है – पंडित राजेन्द्र मिश्रा 

   सिवनी यशो:- सुहागन महिलाओ द्वारा अखंड सुख सौभाग्य एवं कुमारी कन्याओं द्वारा मनोनकुल पति की प्राप्ति हेतु भादों शुक्ल पक्ष तृतीया को हरितालिका तीजा व्रत बडी श्रद्धा भक्ति के साथ निर्जला व्रत किया जाता है । इस व्रत को द्वितीया तिथि युक्त करना पूर्णत: वर्जित है तथा चतुर्थी युक्त करना शास्त्र में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है । इस व्रत को लेकर प्रति वर्ष अनेक प्रकार के संशय और विवाद रहता है । इस वर्ष इस व्रत को लेकर किसी प्रकार का कोई वाद-विवाद नही है । इस वर्ष यह व्रत 6 सितम्बर शुक्रवार को मनाया जायेगा । इस वर्ष हरितालिका व्रत अत्यंत शुंभ योगो से युक्त है, रवियोग बन रहा है तथा शुक्रवार के दिन पड रहा है, इस अदभुत योग से माताओं बहनों की सभी मनोकामनायें पूर्ण होगी शुक्रवार का दिन पडने से शिव-पार्वती जी की  कृपा बनी रहेगी । कठिन तपस्या के रूप मे किया जाने वाला यह व्रत दामपत्य जीवन के सुख को अश्रुण बनाता है। इस व्रत को करने वाली महिलायें नियमों का पूर्ण रूप से पालन करने अन्यथा गलती होने पर इसका प्रथा स्थित करना पडता है ।
   इस वर्ष हरितालिका व्रत भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष दिन शुक्रवार 6 सितम्बर को तृतीया तिथि सूर्योदय पूर्व से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा उसके पश्चात चतुर्थी तिथि लग जायेगी, इसी प्रकार हस्त नक्षत्र सूर्योदय पूर्व लेकर प्रात: 6.45 तक रहेगा। निर्णय सिन्धु धर्म व्रतराज इत्यादि ग्रन्थो मे द्वितीया युक्त तीजा वर्जित किया गया है तथा चतुर्थी युक्त तीजा को सर्वश्रेष्ठ बताया गया  है। इस व्रत मे शिव-पार्वती व गणेश जी की पूजा की जाती है, यह व्रत एक दिन पूर्व से प्रांरभ होकर एक दिन बाद समापन होता है, 6 सितम्बर को किया जाने वाला यह व्रत 5 सितंम्बर दिन गुरूवार की रात्रि 10 बजे से हाथ मुह धोकर दातुन कर प्रारंभ किया जाता है। निराहार निर्जला जो कि 7 सितम्बर दिन शनिवार को प्रात: फुलेरा विर्सजन के पश्चात पारण कर समाप्त किया जाता है । व्रत कर्ता 6 सितम्बर को प्रात: काल नित्य क्रिया से निवृत होकर प्रात: तृतीया तिथि हस्त नक्षत्र मे कलश का दीप प्रज्जवलित कर व्रत का संकल्प को संध्या के समय विधि- विधान के साथ पूजन कर कथा का श्रवण कर रात्रि जागरण करते हुए भजन कीर्तन करते हुए प्रात: काल फुलेरा का विर्सजन कर व्रत का धारण कर पूर्ण निष्ठा के साथ हर-हर महादेव पार्वती का जयकारा लगाकर व्रत का समापन करे ।

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