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शोधकर्ता देश और समाज के लिए शोध करें: कुलगुरू

450 प्रतिभागियों ने सेमीनार मे लिया हिस्सा, जनसामान्य के लिए उपयोगी हो शोध: त्रिपाठी

 Seoni 09 February 2025
सिवनी यशो:- किसी भी विषय पर लिखना या डिग्री प्राप्त कर लेना ही सब कुछ नहीं है महत्वपूर्ण यह है कि आपके द्वारा किया गया शोधकर्ता जनसामान्य के लिए किस तहर उपयोगी हो सकता है या देश के उस शोध से क्या फायदा है। कोई जरूरी नहीं है कि शोध पत्र 500 पृष्ठ के लिखे जाये, मुख्य रूप से आपकी भावना का समावेश उस शोध पत्र में होना चाहिए। शोध के दौरा यह भाव भी मन में नही आना चाहिए। कि हम जो शोध कर रहे है हमारे बराबर कोई नहीं है अगर ऐसा मनोभाव रहेगा तो हम शोध नहीं कर पायेगे, शोध करने वाले इस भाव से शोध करे कि समाज के लिए हम कुछ कर सकें। उक्त उद्गार राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के कुल गुरू प्रो आईपी त्रिपाठी ने शासकीय स्न्नातकोत्तर महाविद्यालय बरघाट में आयोजित एक दिवसीय सेमीनार विषय शोध के एि नवीनतम आयाम, संभावनाये एवं चुनौतियों पर व्यक्ति किये।
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नकल करके ना बनाये शोध पत्र

इसी तारतम्य में सागर से आये डॉ. कृष्ण राव ने कहा कि शोध पत्र में अलकंरण नहीं होना चाहिए, इसमें किसी अन्य ग्रंथ की चार लाइन से अधिक का उल्लेख नहीं होना चाहिए, शोधपत्र में शोध की गई सामग्री अधिकतम मौलिक होनी चाहिए। शोधपत्र विधिवत होना चाहिए। आज कहा जो शोध पत्र लिखे जा रहे है वह शोधार्थी अपने नाम के आगे डॉ. लिखवान के लिए लिये कर रहे है उन्हे शोधपत्र की सामग्री या उसकी मौलिकता से सरोकार नहीं रहता। ये शोध पत्र की कोई उपयोगिता नहीं रहती यह सेमीनार अपने सभी माप दंडो को पूरा करेगा। इस महाविद्यालय का समस्त स्टाप और छात्र छात्राओं की हम भूरी भूरी प्रंशसा करते है।
बरघाट महाविद्यालय के प्राचार्य बीसी झारिया ने कहा कि इस सेमीनार में पधारे कुलगुरू श्री त्रिपाठी जी सहित सागर चित्रकुट सहित अनेक स्थानों से आये विषय विशेषज्ञों का हम अभिंनदन करते है आपने इस जाटिल विषय को अपनी वाणी से सरल बनाया हम आपका आभार व्यक्त करते है।

शोध को लेकर आ रही गिरावट

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आयोजक डॉ. प्रदीप त्रिवेदी ने कहा कि शोधार्थीयों के लिए शोध करने को लेकर जो मानक है उस मानको की जानकारी के लिए यह सेमीनार आयोजित है, शोधार्थी शोध को इस उद्देश्य से करेगे की समाज को वह कुछ दे सके आज यह सेमीनार इसलिए भी रखना पड़ा क्योंकि शोध को लेकर गिरावट आ रही है इसके लिए शोध करने वाले विद्यार्थी ही नही आध्यापक भी जबाव दार है जिस पर चिंतक की जरूरत है।
सेमीनार में लगभग 450 से अधिक शोधार्थी शामिल हुए आयोजन में छिंदवाडा विश्वविद्यालय के रजिस्टार राजेन्द्र मिश्र, सूर्य प्रकाश शुक्ल चित्रकुट, धनराज उइके, निशा जैन छिंदवाडा, हरीश केवट, डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेल रीवा, प्रो एम अरशद सहित जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र राहंगडाले नरेश राजपूत, श्रीमति राजेश्वरी राजपूत, बीएल इनवाती, मोतीचूर सोनी, साहू सहित बरघाट महाविद्यालय के समस्त स्टाप का योगदान रहा।

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