जिन किसानों के खेत डूबे,उन्हें ही नहीं मिल पा रहा जलाशय का लाभ
हर्रई के पापड़ा जलाशय का मामला, मजदूरी करके कर रहे गुजारा
Chhindwara 03 March 2025
छिंदवाड़ा यशो:- (अमरवाड़ा)। अमरवाड़ा अनु विभाग अंतर्गत हर्रई क्षेत्र के पापड़ा जलाशय को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पापड़ा जलाशय के निर्माण में जिन किसानों के खेत डूबे हैं उन्हें इस जलाशय का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। बजाय इसके वह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे हैं। सन 2012,13 में बने लगभग 40.764 हेक्टेयर क्षेत्रफल के जलाशय में 40 से अधिक किसानों की जमीन डूबी है। जिसमें साठिया की 28.50 हेक्टेयर और पापड़ा की 26.253 हेक्टेयर जमीन डूबी है। दो-चार किसानों को छोड़कर बाकी सब किसान मजदूरी करते हुए अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। नियम के मुताबिक जलाशय निर्माण का लाभ भी समिति बनाकर उन ग्रामीणों को प्राथमिकता दी जाती है। जिनकी खेती डूब प्रभावित क्षेत्र से प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रशासन का प्रमुख उत्तरदायित्व बन जाता है कि जिन किसानों की खेती निर्माण के दौरान डूबी है। उन्हें बाकायदा इस जलाशय का लाभ मिले ऐसे प्रयोजन भी प्रशासन द्वारा किए जाने चाहिए।
दूसरे ग्रामीणों के हस्तक्षेप से आ रही समस्या
इस मामले में बताया जा रहा है कि एक समिति जो कि वर्तमान में जलाशय का लाभ ले रही है। वह राजढाना गांगुटोला से है। इसमें महज पापड़ा निवासी तीन से चार ऐसे किसानों को समिति में जोड़ लिया गया है। जिनकी खेती जलाशय निर्माण में डूबी है। बाकी सब ऐसे ग्रामीण है,जिनका जलाशय निर्माण से कोई वास्ता नहीं है। वहीं दूसरी तरफ अपनी डूबी खेती से परेशान और जलाशय का लाभ लेने भटक रहे 30 से 35 ऐसे ग्रामीण है। जिन्हें लगभग 15 सालों के बाद भी इस जलाशय का लाभ नहीं मिला बजाय इसके उन्होंने अपनी खेती उस जलाशय निर्माण में डुबो दी। बरहाल देखना होगा खबर प्रकाशन के बाद संबंधित जिम्मेदार इस पर क्या अहम कदम उठाते हैं।



