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विद्या भारती की शिक्षा का उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना है – डां. मोहनराव भागवत

विश्व भारत की ओर देख रहा है, उसे मानवता की दिशा देनी होगी – डॉ. मोहनराव भागवत
पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का शुभारंभ, 700 से अधिक कार्यकत्र्ता हुये शामिल

Bhopal March 04, 2025विद्या भारती की शिक्षा का उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना है - डां. मोहनराव भागवत - Seoni News

भोपाल यशो:- विद्या भारती द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग 2025 का शुभारंभ हुआ, जिसमें विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष दूसी रामकृष्ण राव जी ने प्रस्तावना रखते हुए कहा कि विद्या भारती के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण हमारा मुख्य लक्ष्य है, जिससे वे शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी बिंदुओं को सम्मानित करते हुए, संगठन के लक्ष्यों में कुछ नई बातों को जोडऩे का भी प्रावधान किया गया है।

इस अवसर पर परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी ने कार्यक्रम के उद्घाटन में कहा विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्?व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी।

विद्या भारती विचारों के अनुरूप शिक्षा का केंद्र –

विद्या भारती की शिक्षा का उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना है - डां. मोहनराव भागवत - Seoni News

डॉ. भागवत ने कहा कि विद्या भारती अपने विचारों के अनुरूप शिक्षा कार्य कर रही है। यह शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के जीवन मूल्यों और संस्कारों का निर्माण भी करती है। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा का कार्य व्यापक है, जो केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना भी है।

युगानुकूल परिवर्तन में निष्क्रिय न रहें –

उन्होंने कहा कि समय के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन इसमें निष्क्रिय होकर बैठना उचित नहीं होगा। मानव अपने मस्तिष्क के बल पर समाज में परिवर्तन लाता है और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह परिवर्तन सकारात्मक हो।

टेक्नोलॉजी की मानवीय नीति आवश्यक –

आज के समय में तकनीक समाज के हर क्षेत्र में अपना प्रभाव डाल रही है। हमें टेक्नोलॉजी के लिए एक मानवीय नीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक में जो कुछ गलत है, उसे छोडऩा पड़ेगा और जो अच्छा है, उसे स्?वीकार कर आगे बढऩा होगा।

विद्या भारती की शिक्षा का उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना है - डां. मोहनराव भागवत - Seoni News

विविधता में एकता का महत्व –

उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विशेषता पर जोर देते हुए कहा कि हमें विविधता में एकता बनाए रखनी होगी। भारत की संस्कृति ने हमेशा सभी को जोडऩे का कार्य किया है, और इसे बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। सब में मैं हूँ, मुझ में सब हैं डॉ. भागवत ने भारतीय दर्शन के इस मूल विचार को रेखांकित किया कि प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि वह समाज का अभिन्न अंग है और समाज भी उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दृष्टिकोण से हमें अपने कार्यों को संचालित करना चाहिए।

विश्व भारत की ओर देख रहा है –

आज विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। भारत ने सदैव सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपने मूल्यों को बनाए रखा है, और यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यदि समाज में परिवर्तन लाना है, तो सबसे पहले व्यक्ति में परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने विद्या भारती की इस दिशा में भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी, जो व्यक्ति के चरित्र निर्माण में सहायक हो।

सभी के कल्याण का उद्देश्य –

उन्होंने कहा कि हमारे प्रयास केवल एक वर्ग या समूह के कल्याण तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि हमें संपूर्ण समाज के कल्याण का लक्ष्य रखना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी शक्ति और संसाधन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समस्त समाज की उन्नति के लिए समर्पित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में कई विचारधाराएँ हैं और हमें उन लोगों को भी साथ लेकर चलना है जो हमारे विचारों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी का भी मत भिन्न हो सकता है, लेकिन कार्य की दिशा सही होनी चाहिए।

विमर्श का स्वरूप बदलना आवश्यक –

डॉ. भागवत ने कहा कि विमर्श का स्वरूप बदलना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है। हमें सकारात्मक सोच और रचनात्मक विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए काम करना चाहिए।

निष्कर्ष –

विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री रामकृष्ण राव जी द्वारा प्रस्तुत भूमिका एवं प्रस्तावना से यह स्पष्ट होता है कि विद्या भारती का मुख्य लक्ष्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाना है। परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी के इस उद्बोधन से यह भी स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बननी चाहिए।

परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन इसकी दिशा सही होनी चाहिए। विविधता में एकता बनाए रखना, तकनीक की मानवीय नीति बनाना और विरोधियों को भी साथ लेकर चलना—ये सभी बातें समाज को एक नई दिशा देने में सहायक होंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों को अपनाते हुए, विद्या भारती इस दिशा में अपने दायित्व को निभाते हुए शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त करने के लिए संकल्पित है। कार्यक्रम में देश भर से अखिल भारतीय पदाधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी के साथ 700 से अधिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी उपस्थित है।

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