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नर्मदा परिक्रमा यात्रा : मीठी तलाई से भरूच तक: एक दिन, कई अनुभव

कपिल पांडे की नर्मदा परिक्रमा यात्रा — भाग 15

एक ओर तपोभूमि का स्पर्श, दूसरी ओर प्रदूषण की पीड़ा, और अंत में नीलकंठेश्वर की शांति

मीठी तलाई की पुण्यभरी सुबह

नर्मदा परिक्रमा की इस सुबह का आरंभ मीठी तलाई के पावन कुंड में स्नान और पूजा से हुआ। यहाँ की शांति और दिव्यता तन-मन को एक नई ऊर्जा देती है। आश्रम के महंत से मुलाकात में पता चला कि यह स्थान लगभग 300 वर्ष पुराने संत सेवा नन्द स्वामी की तपोभूमि रहा है। यहीं पर माँ नर्मदा का एक भव्य मंदिर स्थित है, जिसके दर्शन कर परिक्रमा दल ने अगला पड़ाव आरंभ किया।

औद्योगिक बेल्ट में सांसों की परीक्षा

जैसे ही माँ नर्मदा के दूसरे तट की ओर बढ़े, वातावरण एकदम बदला-बदला सा लगा। यह एक औद्योगिक क्षेत्र (इंडस्ट्रियल बेल्ट) था, जहाँ धुएँ और धुंध ने सांस लेना मुश्किल कर दिया। परिक्रमा की पूरी यात्रा में ऐसा प्रदूषित वातावरण पहली बार अनुभव हुआ — थकान और असहजता ने शरीर को जकड़ लिया।

विनोद भाई की चाय और मन का उत्साह

थोड़ी दूरी पर चोलवाल के पास विनोद भाई से भेंट हुई, जिन्होंने गर्म चाय पिलाकर थकान दूर की। वे स्वयं भी एक बार परिक्रमा कर चुके थे। उनके अनुभव और मुस्कुराहट ने मन में संबल भर दिया।  

आस्था की परीक्षा — परंतु विचलन नहीं

आगे एक व्यक्ति मिले जो साइकिल पर सामान लादे पैदल चल रहे थे। अत्यधिक कमजोरी के बावजूद परिक्रमा जारी रखना — यह उनकी अडिग आस्था का प्रमाण था। वे चार दिन अस्पताल में भर्ती रहे, पर नर्मदा परिक्रमा नहीं छोड़ी।

सदानंद अवधूत आश्रम — विश्राम और सेवा

भरूच से 20 किमी पहले एक सुंदर संत सदानंद अवधूत जी का आश्रम दिखा। वहाँ भोजन मिला, कपड़े धोए, थोड़ा विश्राम किया और फिर पुनः यात्रा आरंभ की।

भरूच: इतिहास, भूगोल और भुनी मूंगफल्ली

सायकल से लगभग 20 किमी का सफर तय कर हम पहुँचे भरूच — एक ऐतिहासिक नगर जिसे महर्षि भृगु की नगरी कहा जाता है। इसे “पीनट सिटी” भी कहा जाता है। यहाँ की मशहूर भुनी मूंगफली खाकर परिक्रमा का स्वादिक अनुभव और गहरा हुआ।

नीलकंठेश्वर महादेव — माँ नर्मदा के चरणों में रात्रिवास

शाम ढलते-ढलते हम पहुंचे नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर, जो माँ नर्मदा के किनारे बसा एक अत्यंत भव्य और शांत स्थल है। यहाँ परिक्रमा वासियों के लिए विश्राम और भोजन की उत्तम व्यवस्था है। रात्रिकालीन पूजा के पश्चात दर्शन किए, भोजन पाया और फिर विश्राम के लिए अपने स्थान पर चले गए।

अगली सुबह, फिर एक नया अनुभव

परिक्रमा जीवन का पर्याय है — हर दिन एक नई शिक्षा, एक नया भाव। कल की भोर हमें फिर एक नई यात्रा पर ले चलेगी…
नर्मदे हर।

संपर्क: editor@dainikyashonnati.com

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