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छिंदवाड़ाक्राइमसिवनी

सिवनी में गिरवी के नाम पर बड़ा खेल! गरीब परिवार के 1.5 किलो चांदी के जेवर हड़पने का आरोप

तीन साल से न्याय का इंतजार, डिलीवरी के समय भी नहीं मिली मदद – पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

सिवनी गिरवी ठगी मामला – पुलिस में दर्ज हुई रिपोर्ट

👉 “भरोसे में दिए जेवर बने मुसीबत, अब दर-दर भटक रहा गरीब परिवार”
लखनादौन/आदेगांव (सिवनी) यशो :– सिवनी जिले के लखनादौन अंतर्गत आदेगांव थाना क्षेत्र से एक बार फिर गरीब और भोले-भाले लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी और ठगी का मामला सामने आया है। एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि इलाके के एक व्यक्ति ने गिरवी के नाम पर उनके कीमती चांदी के जेवर लेकर न केवल हड़प लिए, बल्कि अब उन्हें वापस देने से भी साफ इनकार कर रहा है। मामले में पीड़ित ने थाने में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिवनी के आदेगांव में गिरवी के नाम पर चांदी के जेवर हड़पने का आरोप, पीड़ित परिवार की तस्वीर
आदेगांव में गरीब परिवार के चांदी के जेवर हड़पने का आरोप, कार्रवाई की मांग

 क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बिछुआ निवासी देवेंद्र सिंह परते (उम्र लगभग 35 वर्ष) ने आदेगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि ग्राम प्रेमनगर चौक, आदेगांव निवासी प्रवेश सराठे ने लगभग तीन वर्ष पूर्व उनके घर जाकर उनके चांदी के जेवर- जिनमें छलवाले, पाव जेब, बाकड़ा आदि शामिल हैं- गिरवी के नाम पर रख लिए थे।

पीड़ित का कहना है कि इन जेवरों का वजन करीब डेढ़ किलो के आसपास था, जो उनके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण और कीमती थे। उस समय किसी जरूरत के चलते उन्होंने भरोसे में आकर ये जेवर आरोपी को सौंप दिए, लेकिन अब वही भरोसा उनके लिए मुसीबत बन गया है।

 आरोप: पैसे दिए बिना जेवर रख लिए

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपी ने जेवर लेने के बदले कोई रकम नहीं दी। यानी यह पूरा लेन-देन सिर्फ भरोसे के आधार पर हुआ था। अब जब पीड़ित को अपने परिवार की जरूरतों के चलते जेवरों की आवश्यकता पड़ी, तो उन्होंने आरोपी से संपर्क किया, लेकिन आरोपी टालमटोल करता रहा। पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने बार-बार जेवर वापस मांगे तो आरोपी ने उन्हें साफ मना कर दिया और बहाने बनाने लगा। इससे पीड़ित परिवार गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में आ गया है।

 परिवार की मजबूरी: डिलीवरी का समय, पैसों की जरूरत

देवेंद्र सिंह परते ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि उनकी पत्नी की डिलीवरी का समय चल रहा है और इस समय उन्हें पैसों की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि वे इन जेवरों को बेचकर इलाज और अन्य जरूरी खर्चों की व्यवस्था करना चाहते थे, लेकिन आरोपी द्वारा जेवर वापस न करने के कारण उनकी स्थिति बेहद खराब हो गई है।

यह मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गरीब परिवार की मजबूरी और संवेदनशील स्थिति को भी उजागर करता है।

 तीन साल पुराना मामला, अब भी न्याय अधूरा

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह मामला करीब तीन साल पुराना बताया जा रहा है। इतने लंबे समय तक आरोपी द्वारा जेवर न लौटाना पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना देता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में इस तरह के मामलों की पहले भी चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से ऐसे लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

 पुलिस पर भी उठे सवाल?

पीड़ित ने आदेगांव थाना में विधिवत शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोपी का नाम, पता और पूरा घटनाक्रम बताया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो क्षेत्र में ठगी और धोखाधड़ी की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

 क्या यह अकेला मामला है?

ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। क्षेत्र में कई ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां लोगों को भरोसे में लेकर उनके जेवर या पैसे हड़प लिए जाते हैं।

इस वजह से ऐसे कथित ठगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वे बेखौफ होकर अपने कारनामों को अंजाम देते हैं।

 प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का विषय

इस पूरे मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो आरोपी के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया है और न ही पीड़ित को कोई राहत मिली है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक गरीब और मजबूर लोग इस तरह के अन्याय का शिकार होते रहेंगे? क्या प्रशासन केवल शिकायत दर्ज करने तक ही सीमित रहेगा या फिर पीड़ित को वास्तविक न्याय भी मिलेगा?

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अन्य लोगों की माने तो मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी गरीब परिवार इस तरह की ठगी का शिकार न हो।

 भरोसे का फायदा या सुनियोजित ठगी?

पूरे मामले को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सिर्फ एक साधारण लेन-देन का विवाद नहीं है, बल्कि इसमें भरोसे का गलत फायदा उठाने और संभावित ठगी की बू आ रही है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

क्या पीड़ित को उसका हक मिल पाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

 पीड़ित की मांग

  • चांदी के जेवर तत्काल वापस दिलाए जाएं
  • आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
  • भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं

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