“बड़ा से बड़ा दुःख भी एक दिन समाप्त होता है” — ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी का प्रेरक संदेश
बंदेली में रामकथा का समापन, धैर्य और श्रद्धा का दिया संदेश
राम कथा बंदेली निर्विकल्प स्वरूप जी – जीवन में धैर्य और दुःख-सुख के महत्व पर प्रेरणादायक संदेश दिया
Seoni 17 April 2026
सिवनी यशो:- बंदेली में आयोजित भगवान श्रीराम की दिव्य कथा के समापन अवसर पर पूज्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि संसार में न सुख स्थायी है और न ही दुःख स्थायी है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुःख का आना-जाना प्रकृति का नियम है। जब दुःख का समय आता है, तब निराश होने के बजाय यह विश्वास रखना चाहिए कि यह समय भी अवश्य बीत जाएगा। चाहे कितना भी बड़ा संकट क्यों न हो, एक दिन उसका अंत निश्चित है।

धैर्य ही सफलता की कुंजी
ब्रह्मचारी श्री ने कहा कि जो व्यक्ति धैर्य और संयम बनाए रखता है, वही जीवन में सच्चा सुख प्राप्त करता है। अधीर व्यक्ति न केवल संकट में टूट जाता है, बल्कि प्राप्त सफलता को भी खो देता है। इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य रखना आवश्यक है।
हरि कथा अनंत है
कथा के समापन पर उन्होंने कहा कि जैसे भगवान अनंत हैं, वैसे ही उनकी कथा भी अनंत है। यदि कोई कई कल्पों तक भी कथा का वर्णन करता रहे, तब भी भगवान की महिमा का पूर्ण वर्णन संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से जो भाव व्यक्त किए गए हैं, वे श्रद्धालुओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेंगे।

गुरुदेव को समर्पित श्रेय
कार्यक्रम की सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को नमन किया और कहा कि उनकी अहेतुकी कृपा से ही यह आयोजन निर्विघ्न रूप से संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं का उत्साह सराहनीय
उन्होंने बंदेली के श्रद्धालुओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि नौ दिनों तक निष्ठा पूर्वक कथा श्रवण करना भी एक प्रकार की तपस्या है। इस आयोजन में तन, मन और धन से सहयोग करने वाले सभी भक्तों का कल्याण हो।
समापन संदेश
अंत में उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की कि कथा श्रवण करने वाले सभी श्रद्धालुओं को इस पुण्य का पूर्ण फल प्राप्त हो और उनके जीवन में सुख-शांति का वास हो।
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