मध्यप्रदेशसिवनी

किसान हितैषी मंशा पर पलीता लगा रहा सरकारी तंत्र

फार्मर आईडी की कथित गड़बड़ियों से बढ़ा खाद संकट, किसानों के नाम पर दर्ज ऋणों से मचा हड़कंप; भुगतान कटौती की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता

किसानों के नाम पर फर्जी ऋण – खाद संकट के बाद फर्जी ऋण का झटका, किसानों में बढ़ता आक्रोश

सिवनी यशो:- केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही शिकायतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

गेहूं खरीदी की अव्यवस्थाओं से उपजा असंतोष अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब फार्मर आईडी में कथित गड़बड़ियों, खाद वितरण संकट और किसानों के नाम पर दर्ज ऋणों के मामलों ने नई चिंता खड़ी कर दी है।

किसानों का कहना है कि योजनाओं की मंशा भले ही किसान हितैषी हो, लेकिन सरकारी तंत्र की कार्यशैली उन प्रयासों पर पानी फेर रही है।

फार्मर आईडी की गड़बड़ी से बढ़ा खाद संकट

जानकारी के अनुसार कई किसानों की फार्मर आईडी में वास्तविक कृषि भूमि से अधिक रकबा दर्ज होने के आरोप हैं। कुछ मामलों में मकान, प्लॉट और अकृषि भूमि को भी कृषि रकबे में जोड़ दिया गया है। इसके चलते खाद पात्रता बढ़ गई और सहकारी समितियों से आवश्यकता से अधिक खाद वितरण होने की स्थिति बनी। परिणामस्वरूप वास्तविक जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।

किसानों के नाम पर ऋण, नोटिस से बढ़ी चिंता

मामला यहीं नहीं रुका। अनेक किसानों का कहना है कि उनके मोबाइल पर ऋण जमा करने के संदेश प्राप्त हो रहे हैं, जबकि उन्हें ऐसे किसी ऋण की जानकारी तक नहीं है।

किसानों के अनुसार सहकारी समितियों के रिकॉर्ड में उनके नाम पर लाखों रुपये तक के ऋण दर्ज दिखाई दे रहे हैं।

गेहूं भुगतान से राशि कटने की शिकायत

कुछ किसानों ने आरोप लगाया है कि गेहूं उपार्जन के भुगतान से कथित रूप से ऋण की राशि काट ली गई। जब भुगतान अपेक्षा से कम मिला तो उन्होंने जानकारी जुटाई, तब उनके नाम पर दर्ज ऋणों की जानकारी सामने आई। इन शिकायतों ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

सरकार की मंशा पर भारी पड़ रही व्यवस्थागत खामियां

ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के बजाय रिकॉर्ड की गड़बड़ियां और प्रशासनिक लापरवाही पूरी व्यवस्था की साख को प्रभावित कर रही हैं।

जानकारों का मानना है कि ऐसे मामले विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

जांच और जवाबदेही की मांग

किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों ने फार्मर आईडी, खाद वितरण रिकॉर्ड और किसानों के नाम पर दर्ज ऋण खातों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

https://ecooperatives.mp.gov.in/(S(uyp1qztzjv3khjps2nat5ut0))/default1.aspx

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