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मध्यप्रदेश की ‘शौर्या दल’ बनी महिला सुरक्षा की साइलेंट आर्मी, सीएम डॉ. मोहन यादव ने अगले 5 साल के लिए दी मंजूरी

गांव-गांव महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रखवाली कर रही ‘शौर्या दल’ सेना

शौर्या दल मध्यप्रदेश -22 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं, घरेलू हिंसा से लेकर बाल विवाह तक रोकने में निभा रहीं अहम भूमिका

भोपाल यशो :- मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘शौर्या दल’ योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। वर्ष 2013 में केवल 6 जिलों से शुरू हुई यह पहल अब पूरे प्रदेश में महिला सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता की मजबूत पहचान बन चुकी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित शौर्या दल आज प्रदेश के गांवों और शहरों में महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। बिना किसी वर्दी के काम करने वाली यह ‘साइलेंट आर्मी’ समाज में होने वाले अपराधों और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभा रही है।

अपराध होने से पहले सक्रिय हो जाता है नेटवर्क

शौर्या दल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपराध होने के बाद विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपराध होने से पहले ही उसे रोकने की कोशिश करता है। घरेलू हिंसा, बाल विवाह, मानव तस्करी और महिलाओं के शोषण जैसी घटनाओं की सूचना मिलते ही दल की सदस्य महिलाएं सक्रिय हो जाती हैं और सामुदायिक समझाइश के जरिए कई मामलों को शांतिपूर्वक सुलझा देती हैं।

15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं और युवतियां इस अभियान का हिस्सा हैं, जो पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

22 लाख महिलाओं का सबसे बड़ा सामाजिक नेटवर्क

प्रदेश में वर्तमान समय में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और किशोरियां शौर्या दल से जुड़ी हुई हैं। इनमें 7.64 लाख छात्राएं और युवा लड़कियां शामिल हैं, जबकि 14.88 लाख गृहणियां और अनुभवी महिलाएं समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही हैं।

युवा ऊर्जा और अनुभवी महिलाओं के सहयोग से यह दल सामाजिक कुरीतियों और नकारात्मक सोच के खिलाफ प्रभावी अभियान चला रहा है।

आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरों तक पहुंच

शौर्या दल ने आदिवासी अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया है। यह दल अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी महिलाओं को जागरूक और सशक्त बना रहा है।

महिलाएं अब सरकारी योजनाओं की केवल लाभार्थी नहीं रह गई हैं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना और संघर्ष करना भी सीख चुकी हैं।

देश के लिए मॉडल बन रहा मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश का ‘शौर्या मॉडल’ अब महिला सशक्तिकरण का नया उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को नेतृत्व और जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे समाज में बड़े बदलाव ला सकती हैं।

प्रदेश सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से सामाजिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से लाया जा सकता है।

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