पूरा शहर परेशान, जनप्रतिनिधि मौन: नजूल नवीनीकरण की भूलभुलैया में फंसे हजारों परिवार
अदेयता प्रमाण पत्र और भवन स्वीकृति की शर्त बनी सबसे बड़ी बाधा, एक वर्ष बाद भी अधिकांश लीजधारक इंतजार में
पूरा शहर परेशान, जनता के सेवक मौन: नजूल पट्टा नवीनीकरण में फंसे हजारों लीजधारक
सिवनी यशो :- शहर के हजारों परिवार इन दिनों नजूल पट्टा नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया से परेशान हैं। मार्च 2025 में नजूल विभाग ने शहर के छह हजार से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक पट्टाधारियों को लीज नवीनीकरण के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी। तब दावा किया गया था कि आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पट्टों का नवीनीकरण किया जाएगा। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि सौ प्रकरणों का भी नवीनीकरण पूरा नहीं हो सका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्तमान गति से ही काम चलता रहा तो हजारों लीजधारकों के पट्टों का नवीनीकरण पूरा होने में कितने वर्ष लगेंगे? यही सवाल अब आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
नवीनीकरण से ज्यादा मुश्किल साबित हो रही प्रक्रिया
शहर के नागरिकों का कहना है कि वे पट्टों का नवीनीकरण कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि आम व्यक्ति कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है। सबसे बड़ी अड़चन नगर पालिका परिषद का अदेयता प्रमाण पत्र और भवन निर्माण की वैध स्वीकृति बन गई है।
जानकारों का कहना है कि शहर के अधिकांश मकान और व्यावसायिक भवन कई दशकों पुराने हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे भवनों की है जिनका निर्माण उस दौर में हुआ था जब वर्तमान नगर पालिका अधिनियम या भवन अनुमति संबंधी नियम अस्तित्व में ही नहीं थे। ऐसे में आज उन भवनों के लिए स्वीकृति दस्तावेज प्रस्तुत करने की शर्त हजारों लोगों के लिए असंभव जैसी स्थिति पैदा कर रही है।
नजूल का मामला, फिर भी नगर पालिका की शर्तें
विधि विशेषज्ञों का मानना है कि नजूल पट्टा नवीनीकरण मूल रूप से राजस्व विभाग का विषय है। उनका कहना है कि लीजधारकों को नगर पालिका की प्रक्रियाओं से जोड़ने के कारण अनावश्यक जटिलताएं बढ़ गई हैं। कई लोगों का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों से शासन को भू-भाटक और अन्य शुल्क जमा करता आ रहा है, तो उसके पट्टे के नवीनीकरण को सरल बनाया जाना चाहिए।
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हजारों परिवारों का भविष्य अधर में
सूत्रों के अनुसार शहर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दस हजार से अधिक लीजधारक और उनके परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके मकान, दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान दशकों से संचालित हैं। नवीनीकरण लंबित रहने के कारण लोगों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।
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कई लीजधारकों का कहना है कि शासन ने आवेदन तो मंगवा लिए, लेकिन प्रक्रिया इतनी कठिन बना दी कि अधिकांश लोग बीच रास्ते में ही अटक गए हैं। कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल उठाया है कि यदि नवीनीकरण कराना ही उद्देश्य था तो ऐसी शर्तें क्यों लगाई गईं जिन्हें पूरा करना आम नागरिक के लिए लगभग असंभव है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
हजारों परिवारों को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नगर पालिका के निर्वाचित पार्षद, विधायक, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दल अब तक इस विषय पर खुलकर सामने नहीं आए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब पूरा शहर इस समस्या से जूझ रहा है, तब जनता के प्रतिनिधियों को समाधान के लिए पहल करनी चाहिए।
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प्रशासन से समाधान की उम्मीद
नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन से मांग की है कि नजूल पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। पुरानी संपत्तियों के मामलों में व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए और अदेयता प्रमाण पत्र एवं भवन स्वीकृति जैसी शर्तों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि वर्षों से वैध रूप से निवास और व्यवसाय कर रहे लोगों को राहत मिल सके।
शहर के लोगों का कहना है कि नजूल पट्टा नवीनीकरण का उद्देश्य नागरिकों को राहत देना होना चाहिए, न कि उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने और अनिश्चितता में जीने के लिए मजबूर करना। आज स्थिति यह है कि पूरा शहर परेशान है, लेकिन जनता के सेवक मौन दिखाई दे रहे हैं।



