ओंकारेश्वर में आज भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास करेंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव
45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर रखी जाएगी मंदिर निर्माण की आधारशिला, वैदिक अनुष्ठान के बीच होगा भव्य आयोजन
ओंकारेश्वर में आज पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, CM मोहन यादव करेंगे 45 पवित्र शिलाओं का पूजन
भोपाल/ओंकारेश्वर यशो: -पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में गुरुवार, 27 अगस्त को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 6 बजे एकात्म धाम में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर भारत की दिव्य संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि, षड्दर्शन संत मंडल के पूज्य संत और विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव संतों एवं विशिष्ट अतिथियों के साथ 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे। श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् धर्मगिरि, आंध्रप्रदेश के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी तथा दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् कर्नाटक एवं श्री श्री गुरुकुल के आचार्यों द्वारा वैदिक विधि-विधान से शिला पूजन का अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा।
विविध उपासना परंपराओं का संगम है पंचायतन पूजन
पंचायतन मंदिर का निर्माण जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच स्थापित किए गए समन्वय के दर्शन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
सनातन परंपरा में पंचायतन पूजन का मूल भाव यह है कि विभिन्न देव स्वरूपों के माध्यम से एक ही परम ब्रह्म की उपासना की जाए। शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं के बीच समरसता का यह दर्शन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की विशिष्ट पहचान माना जाता है।
केंद्र में भगवान शिव, चारों दिशाओं में पंचदेव
प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा। चारों कोनों पर चार उप-देवालय बनाए जाएंगे।
- ईशान कोण — भगवान विष्णु
- आग्नेय कोण — भगवान सूर्य
- नैऋत्य कोण — भगवान गणेश
- वायव्य कोण — भगवती शक्ति
मुख्य देवालय का शिखर सोमतिलक शैली में होगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली का होगा। गर्भगृह में चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था रहेगी।
100 नक्काशीदार स्तंभ और 121 कलश होंगे आकर्षण
पंचायतन मंदिर की स्थापत्य भव्यता इसे विशेष पहचान देगी। मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु संवर्णा स्थापित किए जाएंगे। भव्य तोरण-द्वार मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाएंगे।
मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। पूरा मंदिर करीब 16 फीट ऊंचे अधिष्ठान यानी जगती पर निर्मित किया जा रहा है। मंदिर के बाह्य वास्तु-विन्यास को भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के संयोजन से सजाया जाएगा।
मंदिर को 121 कलशों से सुशोभित किया जाएगा। इसके निर्माण में करीब 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है।
प्राचीन नागर शैली में आकार ले रहा मंदिर
पंचायतन मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। मंदिर में भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला की परंपराओं को आधुनिक निर्माण के साथ जीवंत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के पुनरुत्थान का महत्वपूर्ण उदाहरण बनने की दिशा में भी एक कदम माना जा रहा है।
एक ही परम सत्ता के विविध स्वरूपों का संदेश
पंचायतन उपासना दर्शन का मूल संदेश देवताओं की विविधता में एकत्व का है। भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार एक ही परम सत्ता अलग-अलग स्वरूपों में अभिव्यक्त होती है। आदि शंकराचार्य ने शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं के बीच समरसता स्थापित करने के लिए पंचायतन पद्धति को पुनः प्रतिष्ठित किया।
इसी विचार को केंद्र में रखते हुए एकात्म धाम में निर्मित होने वाला पंचायतन मंदिर “विविधता में एकत्व” की सनातन अवधारणा को स्थापत्य के माध्यम से अभिव्यक्त करेगा।
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