सिवनीमध्यप्रदेश

सियासत से रंगमंच तक… राजा शंखपति बने ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह, दर्शकों ने की शानदार अभिनय की सराहना

गृह ग्राम बर्रा में ‘भक्त पूरनमल’ नाटक का मंचन, बचपन के साथियों के साथ कलाकार बने केवलारी विधायक; शानदार अभिनय ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी

गणेश उत्सव में राजा शंखपति बने रजनीश हरवंश सिंह, अभिनय ने जीता दिल

सिवनी यशो :- गणेश पूजा उत्सव के अवसर पर केवलारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह के गृह ग्राम बर्रा में आयोजित ‘भक्त पूरनमल’ नाटक में उस समय माहौल खास हो गया, जब विधायक स्वयं रंगमंच पर कलाकार के रूप में नजर आए। उन्होंने नाटक में पंजाब केसरी राजा शंखपति का किरदार निभाया। राजसी वेशभूषा में सजे विधायक जब मंच पर पहुंचे तो दर्शकों की निगाहें उन पर टिक गईं।

गृह ग्राम बर्रा में गणेश पूजा उत्सव के दौरान राजा शंखपति का किरदार निभाते विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह
राजा शंखपति बने विधायक रजनीश हरवंश सिंह, दर्शकों ने की शानदार अभिनय की सराहना

राजा शंखपति के किरदार में संवाद अदायगी, भाव-भंगिमाओं और मंचीय प्रस्तुति के जरिए रजनीश हरवंश सिंह ने अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और शानदार अभिनय के लिए जमकर प्रशंसा की।

प्रदेशभर में चर्चा में आया विधायक का अनूठा अंदाज

राजनीतिक मंच पर सक्रिय रहने वाले विधायक का रंगमंच पर इस तरह कलाकार के रूप में सामने आना लोगों के लिए खास आकर्षण का विषय रहा। राजा शंखपति के रूप में ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह का यह अनूठा अंदाज प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

खास बात यह रही कि यह किसी औपचारिक कार्यक्रम में की गई प्रतीकात्मक सहभागिता नहीं थी। उन्होंने अपने किरदार को पूरी तन्मयता के साथ निभाया और मंच पर एक सधे हुए कलाकार के रूप में नजर आए।

गृह ग्राम बर्रा में गणेश पूजा उत्सव के दौरान राजा शंखपति का किरदार निभाते विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह
राजा शंखपति बने विधायक रजनीश हरवंश सिंह, दर्शकों ने की शानदार अभिनय की सराहना

जिस गांव में बीता बचपन, वहीं साथियों के साथ मंच पर उतरे

गृह ग्राम बर्रा में आयोजित इस कार्यक्रम का रजनीश हरवंश सिंह के लिए विशेष भावनात्मक महत्व भी रहा। इसी गांव में उनका बचपन बीता और यहीं उनके बचपन के संगी-साथी आज भी मौजूद हैं। उन्हीं साथियों और ग्रामीणों के बीच वे इस नाटक में कलाकार के रूप में मंच पर उतरे।

राजनीतिक जीवन में जनप्रतिनिधि की भूमिका निभाने वाले रजनीश सिंह को अपने ही गांव में इस बार लोगों ने विधायक के रूप में नहीं, बल्कि अपने बीच के साथी और कलाकार के रूप में देखा। मंच पर उनके साथ पुराने साथियों की मौजूदगी ने इस प्रस्तुति को और आत्मीय बना दिया।

ग्रामीण परिवेश पर मजबूत पकड़, लोक संगीत और नृत्य से भी जुड़ाव

ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह का ग्रामीण परिवेश से जुड़ाव केवल इस नाटक तक सीमित नहीं है। पारंपरिक लोक संगीत और ग्रामीण सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी गहरी रुचि है। वे स्थानीय आयोजनों में लोकगीत गाने और नृत्य में भी सहजता से शामिल होते हैं।

ग्रामीण जीवन की भाषा, लोक संस्कृति और पारंपरिक आयोजनों से लंबे समय से जुड़े होने का असर उनके अभिनय में भी दिखाई दिया। राजा शंखपति के किरदार में उनकी प्रस्तुति में ग्रामीण रंगमंच की सहजता और स्वाभाविकता साफ नजर आई।

ग्रामीणों के बीच सहजता और अपनत्व का भाव

गणेश पूजा उत्सव जैसे पारंपरिक आयोजन ग्रामीण समाज को एक साथ जोड़ने का अवसर भी बनते हैं। ऐसे अवसर पर विधायक का अपने गांव के लोगों के साथ मंच साझा करना ग्रामीणों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

उनकी इस प्रकार की सहज उपस्थिति ग्रामीणों के बीच लोकप्रिय होने के साथ अपनत्व का भाव भी प्रकट करती है। ग्रामीण उन्हें केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि अपने बीच पले-बढ़े व्यक्ति के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि लोक संगीत हो, सांस्कृतिक आयोजन हो या रंगमंच—वे जब ग्रामीणों के बीच पहुंचते हैं तो औपचारिकताओं से अलग सहजता के साथ घुल-मिल जाते हैं।

मंच पर विधायक नहीं, नजर आया कलाकार

‘भक्त पूरनमल’ नाटक में पंजाब केसरी राजा शंखपति का किरदार निभाते हुए ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह ने अपने व्यक्तित्व का वह पक्ष सामने रखा, जो आम राजनीतिक गतिविधियों के बीच कम ही दिखाई देता है।

गणेश पूजा उत्सव, गृह ग्राम बर्रा, बचपन के साथी और ग्रामीण रंगमंच—इन सभी का संगम इस आयोजन को यादगार बना गया। मंच पर राजा शंखपति के रूप में उनकी प्रस्तुति और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया।

राजनीति की व्यस्तताओं के बीच अपनी माटी, अपने गांव और अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहकर इस तरह के आयोजनों में भागीदारी करना रजनीश सिंह के व्यक्तित्व के उस सहज पक्ष को सामने लाता है, जिससे ग्रामीणों के बीच उनके जुड़ाव और अपनत्व की झलक मिलती है।

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