मरीज तड़पता रहे, लेकिन बिना डोनर नहीं मिलेगा ब्लड? सिवनी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पर गंभीर सवाल
नागरिकों का आरोप—ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध होने के बावजूद जरूरतमंद मरीज के लिए डोनर की मांग, व्यवस्था पर उठे सवाल
सिवनी ब्लड बैंक पर गंभीर सवाल: बिना डोनर मरीज को रक्त नहीं देने का आरोप
Seoni 07 October 2026
सिवनी यशो:- इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय सिवनी के ब्लड बैंक की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत बिगड़ती रहे, उसे तत्काल रक्त की जरूरत हो, लेकिन बिना डोनर के ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध नहीं कराया जाता।
आरोप है कि जरूरतमंद मरीजों के परिजनों से पहले रक्तदाता यानी डोनर लाने के लिए कहा जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन गरीब और असहाय मरीजों के साथ ऐसा कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है, जो तत्काल रक्तदान कर सके, उनके लिए क्या व्यवस्था है?
‘ब्लड उपलब्ध हो, फिर भी डोनर जरूरी?’
नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ब्लड बैंक में किसी विशेष रक्त समूह का रक्त उपलब्ध है और मरीज को तत्काल उसकी आवश्यकता है, तो क्या केवल डोनर उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को रक्त नहीं दिया जा सकता?
गंभीर स्थिति में मरीज और उसके परिजन पहले ही मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल डोनर तलाशने के लिए भेजना उनके लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
‘रक्त एक्सपायर हो जाए तो क्या होगा?’
नागरिकों ने इससे भी गंभीर सवाल उठाया है कि यदि ब्लड बैंक में उपलब्ध रक्त की निर्धारित अवधि समाप्त हो जाती है और वह उपयोग योग्य नहीं रहता, तो उसका क्या होता है?
लोगों का कहना है कि यदि किसी यूनिट की एक्सपायरी नजदीक है और दूसरी ओर कोई जरूरतमंद मरीज रक्त के लिए परेशान है, तो रक्त के बेहतर और समयबद्ध उपयोग की व्यवस्था क्या है?
हालांकि, यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि ब्लड एक्सपायर होने के बावजूद उसे जरूरतमंद मरीज को दिया जाना चिकित्सा नियमों के अनुरूप नहीं हो सकता। इसलिए वास्तविक व्यवस्था और नियम क्या हैं, इसे ब्लड बैंक प्रबंधन एवं स्वास्थ्य विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
रक्तदान शिविरों के बाद भी मरीज क्यों परेशान?
सिवनी जिले में समय-समय पर सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों में लोग स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं। ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि रक्तदान से एकत्रित रक्त का परीक्षण, भंडारण, रक्त समूह के अनुसार उपलब्धता और जरूरतमंद मरीजों को वितरण किस प्रक्रिया से किया जाता है।
यदि मरीज को रक्त उपलब्ध कराने के लिए हर बार डोनर की आवश्यकता पड़ती है, तो फिर नियमित रूप से आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों से एकत्रित रक्त का उद्देश्य और उपयोग किस प्रकार सुनिश्चित किया जा रहा है—यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
गरीब मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती
सबसे गंभीर स्थिति उन मरीजों की है जिनके परिवार में रक्तदान करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है या जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बेहद कमजोर हैं। दुर्घटना, प्रसव, ऑपरेशन अथवा गंभीर बीमारी की स्थिति में ऐसे मरीजों को तत्काल रक्त की आवश्यकता हो सकती है।
ऐसे में नागरिकों ने मांग की है कि जिला अस्पताल प्रशासन स्पष्ट करे कि बिना डोनर वाले जरूरतमंद मरीजों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था है और किन परिस्थितियों में ब्लड बैंक से रक्त जारी किया जाता है।
ब्लड बैंक की व्यवस्था सार्वजनिक करने की मांग
नागरिकों ने जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से ब्लड बैंक की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। खास तौर पर यह बताया जाना चाहिए कि—
- क्या हर मरीज के लिए रिप्लेसमेंट डोनर अनिवार्य है?
- यदि मरीज के पास डोनर नहीं है तो उसे रक्त उपलब्ध कराने की क्या व्यवस्था है?
- आपातकालीन स्थिति में बिना डोनर वाले मरीज के लिए क्या प्रावधान है?
- ब्लड बैंक में वर्तमान में कितनी यूनिट रक्त उपलब्ध है?
- एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके रक्त का उपयोग किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है?
- रक्तदान शिविरों से प्राप्त रक्त जरूरतमंद मरीजों तक किस प्रक्रिया से पहुंचता है?
मामला सीधे मरीजों की जिंदगी और जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए लगाए जा रहे आरोपों पर जिला अस्पताल एवं ब्लड बैंक प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।
सवाल सीधा है—यदि मरीज को तत्काल रक्त चाहिए और उसके पास डोनर नहीं है, तो क्या व्यवस्था उसे रक्त उपलब्ध कराने के लिए है या उसे पहले डोनर तलाशना ही पड़ेगा?
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