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विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर भाजपा भयभीत

सिवनी यशो:- आगामी समय में संपन्न होने वाले विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। पूरे प्रदेश में बहुत ही कम ऐसे विधानसभा क्षेत्र होंगे जहाँ किसी राजनैतिक दल को अपनी स्पष्ट जीत दिख रही होगी आगामी चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ी हुई है । प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के प्रदेश में लगातार प्रवास हो रहे है । दोनों ही पार्टियों के स्टार प्रचारकों ने मोर्चा संभाल लिया है और चुनावी कसावट बढऩे लगी है । राज्य इकाइयों के साथ-साथ केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य में अपना दखल बढ़ा दिया है। चुनाव में किन मुद्दों पर जोर दिया जाए, किन नेताओं को जिम्मेदारी व जवाबदेही सौंपी जाए, साथ ही किस रणनीति पर आगे बढ़ा जाए, यह तय करने का सारा दारोमदार केंद्रीय नेतृत्व पर है। भाजपा के केन्द्रीय नेता अमित शाह प्रदेश के चुनाव में पूरा ध्यान केन्द्रीत करने वाले है तो कांग्रेस की ओर से कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रिंयका गांधी मध्यप्रदेश की जीत को सुनिश्चित करने के लिये पूरी क्षमता के साथ संकल्पित होकर आगे बढ़ रही है ।

सरकारी खजाना लुटाने के बाद भी असंतोष कम नहीं

भाजपा की सत्तारूढ़ शिवराजा सरकार लगातार सरकारी खजाने से वोटरों को खुश करने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगा रही है परंतु जनता में पनप रहा असंतोष कम होने का नाम नहीं ले रहा है । सरकार के मुखिया होने के नाते शिवराज सिंह चौहान हजारों करोड़ रूपये की रोज घोषणाएँ भी कर रहे है और विकास की गंगा बहाने का संदेश देकर आम जनता को खुश कर रहे है । किसान, मजदूर, व्यापारी, अधिकारी, कर्मचारी, महिलाएँ, युवाओं, छात्रों के साथ ही जाति संगठनों को प्रसन्न करने की सौ प्रतिशत कोशिश कर रहे है परंतु विधानसभा चुनाव में जीत के आ रहे सर्वे भाजपा को भयभीत किये हुये है ।

बूथ स्तर तक समितियाँ गठित: पर कार्यकत्र्ता नाराज

वहीं भाजपा संगठन भी बूथ स्तर पर एक एक पन्ना समिति तक गठन करने की कसरत कर चुका है बूथ स्तर का हर मतदाता भाजपा संगठन के संपर्क में है । सोशल मीडिया के माध्यम से बूथ के मतदाताओं को जोड़ गया है और इन बूथ के कार्यकत्र्ताओं की पूरी जानकारी प्रदेश भाजपा कार्यालय के पास उपलब्ध हर दिन इन्हें भाजपा कार्यालय से बूथ स्तर पर करने लायक काम दिये जाते है । भाजपा ने जमीनी स्तर पर बहुत अधिक मेहनत की है हर दिन भाजपा के कार्यक्रमों के माध्यम से बूथ मजबूती का मंत्र दिया जा रहा है । उसके बाद भी भाजपा जीत के प्रति शंकित है ।

कांग्रेसी कचरा पाकर गौरांवित भाजपा से वरिष्ठ कार्यकत्र्ता नाराज

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है सत्तरूढ़ भाजपा की घबराहट बढ़ती जा रही है । इस घबराहट का मुख्य कारण है भाजपा के कार्यकत्र्ताओं का असंतोष । भाजपा के कार्यकत्र्ताओं के बीच पनप रहा असंतोष भाजपा नेतृत्व के सामने हमेशा छलकते रहा है परंतु भाजपा नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों ने उनकी बातो को हमेशा नजरांदाज किया है परंतु उन असंतुष्ट कार्यकत्र्ताओं ने काम करना बंद नहीं किया । भाजपा नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली से भाजपा की नई पीढ़ी तो दुखी है ही सबसे अधिक दुखी भाजपा के पुराने वरिष्ठ और आम जनता के बीच पैठ रखने वाले कार्यकत्र्ता भी अपने आप को अपमानित महसूस कर कराह रहे है। भाजपा अपनी जीत के प्रति आशांवित नहीं है और उसके पीछे बहुत बड़ी वजह यह भी है कि भाजपा के पुराने कार्यकत्र्ता भाजपा में आ रही नैतिक गिरावट से बहुत गुस्साएँ हुये है और वे भाजपा के नवीनीकरण जिसे वे कांगेसी कचरा को सिर पर गौराविंत भाजपा कहते है से बहुत दुखी है ।

बूढ़े नेतृत्व के मार्गदर्शन में कांग्रेस लड़ेगी चुनाव

वहीं कांग्रेस पार्टी बूढ़े नेताओ के नेतृत्व में चुनावी समर में उतरने वाली है हालांकि इस बार कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत किया है जिला इकाईयों से लेकर सेक्टर, मंडलम और युथ के बीच अपनी पैठ बनायी है । कांग्रेस की पाँच ग्यारंटी वाली घोषणाओं का जनता के बीच व्यापक असर है परंतु कांग्रेस पार्टी के पास युवा नेतृत्व का आभाव कांग्रेस को कमजोर कर सकता है । कांग्रेस मुद्दो से भटक जाती है और जिस प्रभावी तरीके से कांग्रेस की बात आम जनता तक जाना चाहिए उसमें कांग्रेस कमजोर रहती है । कांग्रेस के पास युवा नेताओं की कमी नहीं है परंतु उन्हें हमेंशा अवसर नहीं दिया जाना कांग्रेस की कमजोरी साबित हो रही है । कांग्रेस अपनी बात कहने से अधिक भाजपा की अनावश्यक बुराई करने पर ध्यान देकर अपनी बात भी जनता तक नहीं पहुँच पा रही है ।

भाजपा को भी दिग्विजय सिंह पर भारोसा

हालांकि कांग्रेस पार्टी इस बार पूरी ताकत झौंककर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की रणनीति बना रही है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह जैस मंजे हुये राजनैतिक व्यक्तित्व के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में जा रही है परंतु दिग्विजय सिंह जिस तरह से मुद्दो से कांग्रेस को भटका देते है उससे कांग्रेस की चुनावी दिशा ही बदल जाने का अधिक खतरा रहता है । भाजपा के अनेक नेता इस बात पर विश्वास करते है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस के प्रभावी मुद्दों को चुनावी समय में भटकाकर भाजपा की जीत में सहायक बनकर सामने आते है । भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, मंहगाई, आदि ऐसे मुद्दे है जो अब बहुत अधिक मायने नहीं रखते अब मुफ्त में बाँटने वाली लोक लुभावनी योजनाएँ, भावनात्मक रूप से मतदाताओं को प्रभावित करना, धार्मिक आधार आदि ऐसी बाते है जो चुनाव जीतने के लिये आवश्यक हो गयी है और कांग्रेस यहाँ कमजोर हो जाती है । हालांकि कांग्रेस का सोशल मीडिया प्लेटफार्म भाजपा से अधिक मजबूत है जिसका कांग्रेस को लाभ मिलना सुनिश्चित है । वहीं कांग्रेस को भाजपा की अंदरूनी कलह का व्यापक लाभ हो सकता है । कांग्रेस 2018 के चुनाव में संगठन कमजोर होने के बाद भी सत्ता में काबिज हो गयी थी परंतु इस बार कांग्रेस ने लगातार पाँच वर्ष तक आम जनता के बीच में काम किया है और ग्राम निकाय तथा नगरीय निकाय चुनावों अच्छी सफलता भी प्राप्त की है और यही सफलता भाजपा की घबराहट का कारण भी है कांग्रेस ने यदि बेहतर प्रबंधन और उम्मीदवारों का अच्छा चयन किया तो कांग्रेस को सत्ता का जैकपाट मिल सकता है ।

Dainikyashonnati

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