सौंसर के तीन एथेनॉल प्लांट में प्रतिदिन लाखों लीटर उत्पादन, प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानक अपनाए गए: क्षेत्रीय अधिकारी एम.पी. तिवारी
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा- औद्योगिक इकाइयों की लगातार हो रही निगरानी, हर घर में कम से कम दो पौधे लगाने की अपील
छिंदवाड़ा एथेनॉल प्लांट में लाखों लीटर उत्पादन, प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानक लागू
Chhindwara 02 July 2026
छिंदवाड़ा यशो:- मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एम.पी. तिवारी ने कहा है कि छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले में संचालित औद्योगिक इकाइयों की प्रदूषण नियंत्रण के दृष्टिकोण से नियमित निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पांढुर्ना जिले की सौंसर तहसील के बोरगांव क्षेत्र में स्थापित तीन एथेनॉल संयंत्रों में प्रतिदिन लाखों लीटर एथेनॉल उत्पादन की क्षमता है तथा इन सभी इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण के आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blending) नीति के तहत इन संयंत्रों में उत्पादित एथेनॉल का उपयोग किया जा रहा है।
तीनों संयंत्रों की उत्पादन क्षमता
क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार यू.के.आर. एथेनॉल प्लांट ने वर्ष 2023 में आवश्यक अनुमति प्राप्त की थी और वर्ष 2025 से उत्पादन शुरू किया। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 1.80 लाख लीटर प्रतिदिन है।
वहीं ए.व्ही.जे. एथेनॉल प्लांट लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया है, जिसकी उत्पादन क्षमता 3.50 लाख लीटर प्रतिदिन है।
बोरगांव स्थित गुलशन एथेनॉल प्लांट वर्ष 2023 से संचालित है। लगभग 255 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस इकाई में 5 लाख लीटर प्रतिदिन एथेनॉल उत्पादन की क्षमता है।
प्रदूषण नियंत्रण के आधुनिक उपकरण स्थापित
एम.पी. तिवारी ने बताया कि तीनों संयंत्रों में पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मल्टीपल इफेक्ट इवैपोरेटर (MEE), बैग फिल्टर, आरओ प्लांट, ट्रीटमेंट सिस्टम तथा व्यापक पौधारोपण सहित अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपाय अपनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड द्वारा समय-समय पर इन इकाइयों का निरीक्षण भी किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से मक्का एवं चावल जैसे कृषि उत्पादों से किया जाता है।
घरों से निकलने वाला कचरा भी बड़ी चुनौती
क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल उद्योगों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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उन्होंने कहा कि घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कर नगर निकाय की कचरा संग्रहण व्यवस्था को सहयोग करना चाहिए, जिससे ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव हो सके।
उन्होंने नागरिकों से प्रत्येक घर में कम से कम दो पौधे, विशेषकर फलदार एवं सुगंधित प्रजातियों के पौधे लगाने की अपील की।
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उनका कहना था कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शुद्ध ऑक्सीजन भी उपलब्ध होगी। उन्होंने मीठी नीम (कढ़ी पत्ता) जैसे उपयोगी पौधे लगाने की भी सलाह दी।
https://projectxindia.com/2022/12/02/grain-based-ethanol-distillery-at-silora-village/



