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आज समाज का तो भविष्य में समग्र राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे ये होनहार – डी.एन.

जैन समाज की होनहार प्रतिभाओं को सपरिवार सम्मानित किया नरेश दिवाकर ने

सिवनी यशो:- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अपना सारा जीवन समर्पित कर नगर का गौरव बढ़ाने वाले अपने समय के प्रख्यात चिकित्सक ,लोक तंत्र सेनानी स्वर्गीय डॉक्टर नेमिचंद जी दिवाकर की पुण्य स्मृति में उनकी धर्म पत्नि श्रीमती कमला दिवाकर पुत्र डॉक्टर प्रवीण एवं नरेश दिवाकर पूर्व विधायक द्वारा शैक्षणिक क्षेत्र में विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन स्तर पर सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इस सम्मान को कक्षा छटवी से लेकर स्नातकोत्तर, सी.ए., बी. ई., एम.बी. बी. एस. जैसे अनेक क्षेत्रों में सर्वोच्च अंक लेकर अग्रणीय हुई प्रतिभाओं को पूर्व विधायक परिवार द्वारा सम्मान प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि पूज्य मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से उक्त आयोजित समारोह का अवसर था जैन दिगंबर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज , निर्यापक श्रमण मुनि श्री समयसागर जी महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज एवं गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी के जन्मोत्सव शरद पूर्णिमा पर्व का ।
समारोह में भूमिका संबोधन प्रदान करते हुए पूर्व विधायक नरेश दिवाकर ने कहा कि अपने श्रम,लगन,निष्ठा एवं पूर्ण ईमानदारी से अपने शिक्षा के अभ्यास के प्रति सजग विद्यार्थी निश्चित रूप से सफलता एवं उन्नति के उस मुकाम को प्राप्त करता है जो उसने अपने जीवन का लक्ष्य बना कर निर्धारित किया था और इस प्राप्त सफलता या उन्नति में मात्र उस होनहार प्रतिभा का पुरूषार्थ ही नही अपितु उसके इस पुरूषार्थ की सफलता में परोक्ष रूप से जो सबसे बड़ा श्रम एवं योगदान रहता है उसके पीछे माता पिता के सपने जो उन्होंने अपनी संतति के उज्ज्वल भविष्य के लिए देखे थे,उनकी खून पसीने की कमाई जो उन्होंने स्वयं अभाव में रहकर अपने बच्चो के स्वर्णिम भविष्य के निर्माण के लिये लगाई थी। ऐसे कर्मयोगी व्यक्तित्व जो इन होनहारों के अभिभावक है वे इन प्रतिभाओं के सम्मानित होने के पूर्व सम्मान के प्रथम अधिकारी है। इन्हीं भावनाओं से अपने पूज्य पिता जी की पुण्य स्मृति में प्रतिभा सम्मान के पूर्व उनके अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा और सबसे बड़ी बात यह है कि मैं और मेरा परिवार तो मात्र निमित्त है इस आयोजन का किंतु सत्य तो यही है इस आयोजन के असली हकदार तो सकल जैन समाज सिवनी ही है आज पूज्य मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज के आशीर्वाद से आप सभी की वृहत उपस्थिति में पूज्य आचार्य श्री, मुनि युगल एवं पूज्य गणिनि माता जी के जन्मोत्सव शरद पूर्णिमा जैसी पावन तिथि पर इस प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है।
पूज्य आचार्य श्री के साधनामयी जीवन पर प्रकाश डालते हुए नरेश दिवाकर ने विचार व्यक्त किए यदि संसार का सबसे बड़ा पर्वत एवरेस्ट की कलम से सभी सागर,सरिता एवं समुद्रों के जल की स्याही बना ली जाए और सारे आकाश और धरती को कागज बना कर उनके गुणों के बखान को लिखा जाए तो कलम कागज और स्याही सभी समाप्त हो जायेंगे किंतु उनकी महिमा लिख नही पाएंगे। भारतीय संस्कृति में उनका अवदान स्तुत्य है।दूसरी और तीर्थंकर भगवंतो की जन्म भूमियों,अनेक नव तीर्थों का निर्माण, पुरा तीर्थों का जीर्ण उद्धार एवं अनेक जिनवाणी के साहित्यों का लेखन करने वाली गणिनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी जिनकी दीक्षा को 72 वर्ष पूर्ण हुए आज 90 वर्ष की आयु में भी अपने महाव्रतो का पालन करते हुए स्वस्थ एवं प्रसन्न चित्त है। जिन शासन के ये दोनो व्यक्तित्व न भूतो न भविष्यति… जन जन के आदर्श आराध्य है।
सभा का संचालन विपनेश जैन एवं पारस जैन द्वारा किया गया। चयनित सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले होनहारों को परिवार द्वारा स्मृति चिन्ह,प्रमाण पत्र,उपहार जबकि अभिभावकों को शाल,माला तिलक से अभिनंदन किया गया।इस अवसर पर सुदर्शन बाझल,मिलन बाझल,संजय नायक, अभय कुमार जैन,प्रभात सेठ, प्रफुल्ल जैन बंटी,मनोज बाझल, विपनेश जैन,सुबोध बाझल आफसेट, पी के जैन,आनंद सेठ,सुनील सेठ,प्रशांत जैन, आलोक जैन,भूपेंद्र जैन,डॉक्टर अपूर्व,पारस जैन, भानु पटेल,सुबोध बाझल शिक्षक,प्रभात वीडी,सुक्कन जैन,आदि बड़ी संख्या में समाज के सदस्य सदस्याएं उपास्थित रहे।देर रात तक चले इस कार्यक्रम के दरमियान केशर मिश्रित दूध का वितरण नव युवकों द्वारा किया गया। सभा समापन पर आभार प्रदर्शन डॉक्टर अपूर्व जैन ने किया।

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