सिवनी यशो:- तीन राज्यों में कांग्रेस की करारी हार के बाद तीनों राज्यों में प्रदेश के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस में उठा पटक का दौर जारी हो गया है । मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ के एक पुराने मित्र एवं कांग्रेस के नेता बलकरण पटेल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे की मांग तक कर डाली है । वहीं मीडिया में यह खबर भी आने लगी थी कि कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ से इस्तीफे की पेशकश कर दी है । इन खबरों को बाद कमलनाथ ने खंडन किया और कहा कि इस यह अफवाहें है । आलाकमान ने उनसे कोई इस्तीफा नहीं मांगा है ।
मीडिया में यह खबर बड़ी तेजी से चली कि कांग्रेस के उच्च स्तरीय सूत्रों के हवाले से चल रही खबरों के मुताबिक मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद आलाकमान प्रदेश में कांग्रेस में बदलाब के मूड में है । चल रही खबरों के मुताबिक प्रदेश विधानसभा के परिणामों से कांग्रेस आलाकामना बेहद निराश है । जानकारी के अनुसार कांग्रेस आलाकमान बहुत जल्द प्रदेश अध्यक्ष बदल सकता है। आलाकमान को लगता है कि बीजेपी के शिवराज सिंह चौहान जैसी सक्रियता कमलनाथ में नहीं है । कांग्रेस को सक्रिय रखने के लिये कांग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व किसी युवा चेहरे को कांग्रेस की बागडोर प्रदेश में दे सकता है । कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ को राज्य में सीएम का चेहरा घोषित किया हुआ था. आलाकमान ने उन्हें पूरी छूट भी दी थी लेकिन नतीजे कांग्रेस के पक्ष में बिल्कुल नहीं गए ।
रविवार को प्रदेश विधानसभा के आये चुनाव परिणामों बीजेपी को मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 163 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया जबकि कांग्रेस 66 सीटों पर ही सिमट गयी । . इसके बाद से कांग्रेस के खेमे में हलचल है । सोमवार को चली खबर के अनुसार कांग्रेस आलाकमान एक्शन मोड में आ गया है और खबरों के मुताबिक कमलनाथ से मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग हाईकमान की तरफ से की गई है ।
यहाँ यह बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रचार के केंद्र बिंदु पीसीसी चीफ कमलनाथ ही रहे । जानकारों का ये भी कहना है कि इसका भी कांग्रेस को नुकसान हुआ है. साथ ही इसके और भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं । हालांकि कमलनाथ अपनी सीट बचाने में कामयबा रहे लेकिन प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते उनके नेतृत्व में पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा ।
वहीं कमलनाथ का गढ़ कहे जाने वाले महाकौशल में भी इस बार बीजेपी ने सेंध लगा दी । हालांकि पिछले चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस छिंदवाड़ा जिले की कमलनाथ के प्रभाव वाली सभी 7 सीटें जीतने में कामयाब हुई है, लेकिन महाकौशल में उसे 8 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है ।
बता दें कि मध्य प्रदेश के महाकौशल इलाके में जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और कटनी जिले आते हैं । इन 8 जिलों में कुल 38 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें इस बार बीजेपी के 21 उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधायक बने हैं. पीसीसी चीफ कमलनाथ के साथ कांग्रेस के 17 उम्मीदवार जीतने में कामयाब हुए है । कमलनाथ सरकार में वित्त मंत्री तरुण भनोट और विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के साथ विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे को भी हार का सामना करना पड़ा है ।
कांग्रेस की हार के जानकार अनेक कारण बता रहे है जिसमें प्रमुख कारण यह रहा है कि कमलनाथ का नेतृत्व कमलनाथ के नेतृत्व से प्रदेश में एक अफवाह रही है कि यदि वह मुख्यमंत्री बने तो पूरा विकास छिंदवाड़ा तक ही केन्द्रित रहेगा प्रदेश के अन्य हिस्सों की उपेक्षा होते रहेगी उनके 18 माह के कार्यकाल में ऐसा हुआ भी था । कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री रहते हुये जनता से किये वायदों की गंभीरता से चिंता नहीं किसान कर्ज माफी में फेल होना भी कांग्रेस की बड़ी हार का कारण रहा है ।
यहाँ बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की अगुवाई में कांग्रेस ने जो लोकलुभावनी घोषणाएँ की वह फेल होगयी और भाजपा ने उन योजनाओं को हाईजैक कर उस अमल प्रारंभ करना प्रारंभ कर दिया और कांगे्रस अपनी योजनाओं को जनता तक बता पाती उसके पहले ही भाजपा ने जनता को लाभ देना प्रारंभ कर दिया और भाजपा ने अपनी कल्याणकारी योजनाओं को इतने आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया कि कांग्रेस का प्रचार फीका रहा है । यहाँ बता दें कि कांग्रेस आम आदमी तक प्रचार का तंत्र बहुत कमजोर रहा जबकि भाजपा के आई टी एवं सोशल मीडिया की पहुँच हर बूथ स्तर के कार्यकत्र्ता तक रही है । बीजेपी की बूथ स्तर की टीम भाजपा की हर बात को पूरी जिम्मेदारी से पहुँचाने में सफल रही जबकि कांग्रेस का कार्यकत्र्ता इतना सक्रिय और समर्पित नहीं रहा ।





