एक पार्षद और कांग्रेसी नेता का वन भूमि पर अवैध, सोशल मीडिया में हो रहा वायरल
पटवारी, आर आई और रीडर की मिलीभगत से भू – माफियाओं की चांदी
Seoni 10 May 2025
सिवनी यशो:- लखनादौन के आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला अब सोशल मीडिया में छाया हुआ है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, व्हाट्सएप पर वायरल हो रही खबरों ने आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे जैसे गोरखधंधे की कलई खोलकर रख दी है, और इन खबरों ने नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा को चटखारेदार बना दिया है । पहले, वर्तमान पार्षद और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से वन भूमि पर अवैध कब्जा और भूमि उपयोग परिवर्तन का मामला सामने आया था। अब, इन्हीं सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक प्रभावशाली पूर्व कांग्रेसी नेता पर भी सरकारी जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे भूमाफिया और राजनीतिक सांठगांठ का संदेह गहरा गया है।
व्हाट्सएप पर प्रसारित खबरों के अनुसार, सूत्रों का दावा है कि इस पूर्व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, जो पूर्व में जनपद उपाध्यक्ष और विद्युत मंडल पावर हाउस सब स्टेशन से भी जुड़े रहे हैं, ने कथित तौर पर शहर के नजदीक स्थित दो एकड़ बेशकीमती ग्रीन फॉरेस्ट रिजर्व भूमि को अपने राजनीतिक रसूख और पूर्व वन मंत्री से नजदीकी का फायदा उठाकर अदला-बदली के नाम पर अपने परिवार के सदस्यों के नाम करा लिया। खबरों में यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि इस जमीन को भूमाफिया को बेचकर रजिस्ट्री भी करा दी गई है और उस पर अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही है, जबकि कॉलोनाइजर एक्ट के तहत कोई अनुमति नहीं ली गई है। इन खबरों में यह भी दावा किया जा रहा है कि इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, जिन्हें अब एकत्रित कर इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन खबरों ने लखनादौन में जमीन के हेरफेर के चल रहे संगठित अपराध की पोल खोल दी है। पहले ही पार्षद पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और रीडर की संदिग्ध भूमिका उजागर हो चुकी है, और अब एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति का नाम जुडऩे से यह स्पष्ट होता है कि भूमाफिया का जाल कितना गहरा और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
इन खबरों में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इन नेताओं ने पहले भी सरकार की शहर की बेशकीमती जमीनों पर अपना आधिपत्य जमा रखा है। आरोप है कि सरकार से लीज पर जमीन लेकर कॉम्प्लेक्स बनाकर अकूत संपत्ति अर्जित की जा रही है।
सोशल मीडिया पर उमड़ रही तीखी प्रतिक्रियाओं में जनता वन विभाग और जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की पुरजोर मांग कर रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सोशल मीडिया पर प्रसारित इन सनसनीखेज खबरों के बाद प्रशासन सक्रियता दिखाता है और इस पूर्व कांग्रेसी नेता, जो अब भूमाफिया के साथ मिलकर काम करने के आरोपों से घिरे हैं, के खिलाफ भी गहन जांच शुरू करता है। लखनादौन के इस वन भूमि घोटाले पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, और सोशल मीडिया इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए हुए है, जिससे भूमाफिया और उनके राजनीतिक संरक्षकों के बीच गठजोड़ की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, साथ ही सरकारी जमीनों पर कथित कब्जों का भी पर्दाफाश हो सकता है।
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