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धर्ममंडलामध्यप्रदेश

शस्त्र और शास्त्र की सत्ता से युक्त सर्वशक्तिमान चिरंजीवी भगवान श्री परशुराम – भीष्म द्विवेदी

मंडला यशो:- सृष्टि के कल्याण और सनातन की धर्म ध्वजा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं भगवान श्री परशुराम स भाजपा जिला अध्यक्ष भीष्म द्विवेदी ने, सर्व समर्थ सर्व शक्तिमान भगवान परशुराम जी के प्रागट्य दिवस के परम पुनीत अलौकिक शुभ अवसर पर जिले वासियो को शुभकामनाएं प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि धर्म रक्षा के लिए सर्व समर्थ भगवान धरती पर अवतार लेते हैं दुष्टों राक्षसों के विनाश के लिए भगवान अवतरित होते हैं, तथा इस मायारूपी संसार का माया के द्वारा ही उद्धार करते हैं द्य भगवान परशुराम श्रीहरि विष्णु जी के अवतार है। अर्थात श्रीहरि ही परशुराम के रूप में धरती पर अवतरित हुए। भगवान परशुराम शिव जी के उपासक साधक है। परशुराम जी अखिलकोटी ब्रम्हांड स्वामी शिवजी की कृपा वा शक्ति से सुसज्जित है परिपूर्ण है। मानवता की रक्षा के लिए , धर्म की स्थापना के लिए दानवी शक्तियों का समूल नस्ट करने के लिए जगत पिता स्वयं मानव रूप में धरती पर आते है द्य जिनका उद्देश्य धरती को धर्म से युक्त करना दुष्ट ताकतों से मुक्त कर मानवीयता स्थापित करना धरती पर सत्य शक्ति का पोषण करना है। धर्म की रक्षा के लिए भगवान धरती पर अवतार लेते हैं। दुष्टों राक्षसों का विनाश करते है जो व्यक्ति धर्मानुकूल आचरण करता है श्रीहरि सदैव उसका पोषण करते है,उसे सफलता उन्नति प्रदान करते है। उनके जीवन को अपनी कृपा से युक्त कर देते है।भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जी ने एक ओर जहां दुरात्माओं का समूल नाश किया वही भगवान शिव की अंनयन भक्ति कृपा तथा शिक्षा से समूचे मानव जाति का कल्याण किया भगवान परशुराम से बड़ा कोई शिक्षक नहीं हुआ, और ना महान योद्धा द्यभगवान परशुराम जहां उच्चतम आदर्शों मानबिंदुओं के संस्थापक थे वह शस्त्रधारण कर प्रजा की रक्षा करने में भी तत्पर थे द्य भगवान परशुराम एवं भगवान श्रीराम जी का संवाद जो की धनुष तोडऩे के संदर्भ में है जिससे हम सभी परिचित है भगवान परशुराम जी के प्रेरक व्यक्तित्व तथा उनके द्वारा किए गए दिव्यकार्यों से सम्पूर्ण धरा अवगत है।भगवान परशुराम का आदर्श चरित्र सभी युगों में सदा प्रासंगिक है। यद्यपि वो चिरंजीवी है। वो धरती पर ही विद्यमान है। वे यथार्थ की ओजस्वी तेजस्वी सर्व समृद्ध शिला पर सुप्रतिष्ठित हैं ,जो श्रीहरि सर्वशक्तिमान है हम सभी के मनोरथ पूर्ण करने वाले है जो सज्जनों ,संतो अपने उपासकों के लिए फूल से भी कोमल तथा दुष्ट दुरात्माओं राक्षसों अधर्मियो के लिए वज्र से भी कठोर है। -‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि अन्त: वृत्तियों के संवाहक हैं। मनुष्य में ‘सत् और ‘असत् का द्वन्द्व कॉमन है। उसके ‘सत् का संवर्द्धन करने के लिए ‘शास्त्र और ‘असत् का नियंत्रण करने के लिए ‘शस्त्रÓ का विधान सभ्यता के अरूणोदय काल में किया गया। आज भी मानव चरित्र सत् और असत् से घिरा है, अत: युग-युगान्तर की यात्रा के बाद आज भी शास्त्र और शस्त्र की सत्ता स्वीकृत है।भगवान श्री परशुराम जी धर्म, न्याय एवं सामाजिक समानता के साक्षात विग्रह हैं। जब-जब भी समाज में सज्जन शक्ति पर अत्याचार हुआ, तब-तब भगवानश्री ने शोषण करने वाले अताताइयो को दंडित किया। पृथ्वी पर सत्य, समानता, दया, करुणा तथा न्याययुक्त धर्म की स्थापना की। सदैव लोकहित में तत्पर रहने वाले भगवान परशुराम जी की भक्ति और शक्ति से प्रशन्न भगवान शिवजी परशुराम जी से अत्यधिक प्रेम स्नेह करते थे। श्री दिवेदी ने कहा कि श्रीहरि स्वयं परशुराम है जो शिव जी के उपासक है। आप सज्जन शक्ति के पोषक है। आप सर्वशक्तिमान है। हम सबको इस पावन पुनीत अवसर पर अपने घर के देवालय में घर के पास की मंदिर में एक एक दीप जलाकर प्रभु श्री का स्मरण करके प्रभु श्री का आशीर्वाद प्राप्त करना है हम सभी को महान संत भगवान श्री परशुराम के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेते हुए समाज और राष्ट्र कल्याण में योगदान देना चाहिए।

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