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भाजपा मंडल अध्यक्ष का बड़ा आरोप – जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों की साठगांठ से हो रहे हैं गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य

मंत्री प्रहलाद पटेल को पत्र, भ्रष्ट तंत्र पर कार्रवाई की मांग | शासन-प्रशासन में हलचल

Seoni 25 july 2025

जिले में निर्माण कार्यों में व्यापक अनियमितताओं को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय चौधरी ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को पत्र लिखा है।

पत्र में आरोप है कि कुछ जनप्रतिनिधि और ठेकेदार मिलकर पंचायतों में नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं, और जो अधिकारी ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, उन्हें दबाकर या हटाकर किनारे किया जा रहा है।

क्या है पत्र में?

भाजपा मंडल अध्यक्ष ने लिखा है कि:

  • कई वर्षों से पंचायतों में बिना टेंडर और नियमविरुद्ध तरीके से कार्य कराए जा रहे हैं।

  • निर्माण कार्यों के अनुमानों को जानबूझकर अधिक दिखाया जाता है, लेकिन धरातल पर केवल 30-40% लागत में ही घटिया काम पूरा कर लिया जाता है।

  • निर्माण के लिए जिम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों पर दबाव डालकर 20% तक की कमीशनबाजी चलाई जा रही है, जिसमें जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और कुछ अफसर भी शामिल हैं।

  • यदि कोई अधिकारी इसका विरोध करता है, तो राजनीतिक दबाव, फर्जी शिकायतें, या फिर स्थानांतरण का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है।

‘भ्रष्ट गठजोड़’ का आरोप, सत्तारूढ़ दल में असमंजस

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता स्वयं भाजपा का मंडल अध्यक्ष है और पत्र उन्हीं के मंत्री को लिखा गया है, तो आखिर वे किसे कठघरे में खड़ा कर रहे हैं? पत्र की भाषा यह स्पष्ट करती है कि अब भाजपा के अंदर से ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाजें उठ रही हैं।

क्या चाहते हैं विजय चौधरी?

  • पंचायतों और जनपद स्तर पर चल रहे संपूर्ण निर्माण तंत्र की निष्पक्ष जांच

  • गुणवत्ता की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई

  • ऐसे भ्रष्ट गठजोड़ को तोड़कर ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण

जमीनी हकीकत – जिला स्तर पर कैसी है स्थिति?

जानकारों का कहना है कि यह समस्या किसी एक ठेकेदार तक सीमित नहीं है। पूरे जिले में ऐसे गठबंधन-तंत्र ने जड़ें जमा ली हैं जहाँ ठेकेदार, जनप्रतिनिधि और कुछ अफसर मिलकर जनता के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की बात करना यहाँ ‘अपराध’ जैसा माना जाता है।

अब आगे क्या?

  • क्या मंत्री प्रहलाद पटेल इस पत्र को गंभीरता से लेंगे?

  • क्या भाजपा अपने ही भीतर उठ रही आवाजों पर आत्ममंथन करेगी?

  • क्या भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई होगी?

यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन एक बात स्पष्ट है — अब भाजपा के भीतर ही जनहित और जनधन के अपव्यय के खिलाफ असंतोष फूटने लगा है।

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