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विधायक द्वारा लगाया गया प्रश्न विधानसभा पटल पर रखने से पहले ही सार्वजनिक!

 गोपनीय प्रक्रिया पर सवाल, गरिमा भंग की आशंका, जाँच की उठी माँग

 Seoni 25 July 2025

सिवनी यशो : – मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 28 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही विधानसभा की गोपनीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। सिवनी जिले के एक विधायक द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न का विवरण सदन के पटल पर रखे जाने से पूर्व ही सार्वजनिक हो गया है। यह घटना विधानसभा की संवैधानिक गरिमा और संचालन नियमों के प्रतिकूल मानी जा रही है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, विधायक द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत प्रश्न का पूरा प्रारूप — जिस पर विभागीय उत्तर अभी आना शेष है — पहले ही सोशल मीडिया व कुछ पत्रकारों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से प्रसारित किया जा चुका है। जबकि मध्यप्रदेश विधानसभा संचालन नियमावली के अनुसार, प्रश्न एवं उसका उत्तर तब तक गोपनीय माने जाते हैं जब तक वह सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं हो जाते।

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संचालन नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन

मध्यप्रदेश विधानसभा संचालन नियमावली की धारा 27(3) में यह स्पष्ट उल्लेखित है:

“प्रश्न और उत्तर दोनों उस दिन तक गोपनीय माने जाएंगे, जब तक वे सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं हो जाते।”

इस प्रकार, यह घटना न केवल नियमावली का उल्लंघन है, बल्कि विधानसभा की कार्यवाही की गोपनीयता और गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

 जाँच की उठी माँग

विधानसभा से पूर्व ही प्रश्न का सार्वजनिक होना कई आशंकाएँ उत्पन्न करता है —

  • क्या यह लीक विधानसभा सचिवालय से हुआ?

  • क्या संबंधित विभाग या अधिकारी ने प्रश्न को जानबूझकर सार्वजनिक किया?

  • या फिर विधायक स्वयं इस प्रक्रिया के नियमों से अनभिज्ञ थे?

इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जाँच की माँग विभिन्न जनप्रतिनिधियों व जानकारों द्वारा की जा रही है।

सदन की गरिमा सर्वोपरि

विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंच की गरिमा और प्रक्रियात्मक शुचिता बनाए रखना प्रत्येक विधायक, अधिकारी और विभाग की जिम्मेदारी है। यदि इस प्रकार की घटनाओं को रोका नहीं गया तो यह भविष्य में गंभीर संवैधानिक संकट खड़ा कर सकती है।

संबंधित नियम: मध्यप्रदेश विधानसभा संचालन नियमावली

नियम 27(3)

“प्रश्न और उत्तर दोनों उस दिन तक गोपनीय माने जाते हैं, जब तक वे सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं हो जाते।”

इसका सीधा आशय है कि —

  • कोई भी प्रश्न, जब तक सदन में प्रस्तुत नहीं होता, वह गोपनीय होता है।

  • अधिकारी को यदि उत्तर तैयार करने के लिए वह प्रश्न भेजा गया है, तो भी वह उस प्रश्न या उत्तर को सार्वजनिक नहीं कर सकता।

नियम 34 – प्रश्नों की गोपनीयता (Confidentiality of Questions)

“कोई सदस्य या अन्य व्यक्ति ऐसा कोई प्रश्न या उससे संबंधित उत्तर अथवा दस्तावेज, जो अभी तक सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया है, उसे बिना अध्यक्ष की अनुमति के सार्वजनिक नहीं करेगा।”

यह स्पष्ट करता है कि:

  • जब तक प्रश्न सदन में प्रस्तुत नहीं हो जाता,

  • तब तक उसे प्रेस, सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर साझा करना नियमों का उल्लंघन है।

  • इसमें निम्न प्रावधान शामिल हैं:

    • नियम 27 – प्रश्नों का प्रकाशन (Publication of Questions)

    • नियम 34 – प्रश्नों की गोपनीयता (Confidentiality of Questions)

    • नियम 231, 234, 267 आदि – संचालन नियमों से जुड़ी विविध व्यवस्थाएँ

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