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सदन से पहले ही लीक हुआ विधायक का प्रश्न, सरकार की गोपनीयता व्यवस्था पर उठे सवाल

भाजपा शासन में अफसरशाही बेलगाम!

Seoni 26 July 2025

सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 29 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, लेकिन उससे पहले ही एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा से विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया एक गोपनीय प्रश्न सदन के पटल पर प्रस्तुत होने से पहले ही सार्वजनिक हो गया है।

इस घटनाक्रम से जहां विधानसभा की गोपनीयता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं, वहीं इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि सरकारी तंत्र के भीतर से सूचनाएँ लीक हो रही हैं। यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित मानसिकता का परिणाम माना जा रहा है।

 क्या था मामला?

विधायक ठाकुर रजनीश ने केवलारी विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों में ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ विधानसभा में प्रश्न प्रस्तुत किया है। उनका यह आरोप है कि विकास के नाम पर धन की खुली बंदरबांट हो रही है, और इसमें प्रशासनिक तंत्र की भूमिका संदेह के घेरे में है।

लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि यह प्रश्न—जो कि विधानसभा सचिवालय के निर्धारित गोपनीय स्वरूप में होता है—सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पहले ही सार्वजनिक हो गया।

 विधायक ठाकुर रजनीश का बयान   

“केवलारी विधानसभा में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। मैंने इसे लेकर विधानसभा में प्रश्न लगाया है। लेकिन इस प्रश्न की गोपनीयता भंग कर दी गई है। यह कोई साधारण लीक नहीं है, बल्कि सरकार की कमजोर निगरानी और बेलगाम अफसरशाही का परिणाम है।”

– ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह, विधायक, केवलारी

उन्होंने यह भी कहा कि—

“यदि यह लीक किसी अधिकारी द्वारा हुआ है, तो यह न केवल विधानसभा की गरिमा को ठेस है, बल्कि विधायकों को मानसिक रूप से परेशान करने और ब्लैकमेल करने की मंशा भी इसमें निहित हो सकती है।”

क्या कहता है नियम?

मध्यप्रदेश विधानसभा संचालन नियमावली  के अनुसार, किसी भी विधायक द्वारा प्रस्तुत प्रश्न तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता जब तक कि वह प्रश्न विधानसभा सचिवालय द्वारा स्वीकृत होकर विधिवत रूप से पटल पर प्रस्तुत न हो जाए।

यह भी पढ़े :-<विधायक द्वारा लगाया गया प्रश्न विधानसभा पटल पर रखने से पहले ही सार्वजनिक!/p>

इस प्रकरण में स्पष्ट रूप से विधानसभा की गोपनीयता नीति का उल्लंघन हुआ है, जो विधायकों के अधिकारों और सदन की गरिमा के विरुद्ध है।

 मांग – निष्पक्ष जाँच व जवाबदेही तय हो

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह इंगित करता है कि किस प्रकार से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की जगह साजिश और अनैतिकता पनप रही है। विधायक ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

एक जनप्रतिनिधि का संवेदनशील प्रश्न सदन में चर्चा से पहले ही सार्वजनिक हो जाना मात्र संयोग नहीं हो सकता। यह दर्शाता है कि लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले विधानसभा की आंतरिक सुरक्षा और गोपनीयता को खतरा है।

यदि सरकार इस मामले पर मौन रहती है, तो यह उसकी नैतिक विफलता मानी जाएगी।

यह रिपोर्ट दैनिक यशोन्नति द्वारा विशेष अन्वेषण पर आधारित है।
सूचना सत्य है, साक्ष्य प्रेषित है, और उत्तरदायित्व शासन का है।

Dainikyashonnati

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