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किसान हित में नहरों का सीमेंटीकरण किया जाना जरूरी- डॉ. बिसेन

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सांसद ने किसानों के नुकसान पर किया ध्यान आकृष्ट

सिवनी यशो:- देश में अनेक ऐसे तालाब है जो करीब 50 से 100 वर्ष तक पुराने है। मरम्मत एवं रखरखाव के अभाव में वर्षों पुराने इन तालाबों एवं इनकी नहरें अत्यंत जीर्णक्षीर्ण अवस्था में पहुंच गई है।नहरों के जीर्णक्षीर्ण होने के कारण ज्यादातर पानी रिसकर बर्बाद हो जाता है, जिससे किसानों को सिंचाईं के लिए पानी नहीं मिल पाता है और उनकी फसलों के उपज पर प्रभाव पड़ता है। संसदीय क्षेत्र बालाघाट अंतर्गत सिवनी एवं बालाघाट में अनेक जलाशय और उसकी नहरें जीर्णक्षीर्ण अवस्था में है। यदि इनका जीर्णोंद्धार एवं नहरों का सीमेंटीकरण कर दिया जाये तो पानी के रिसाव की समस्या का समाधान हो जायेगा और खासकर टेल क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाईं हेतु पर्याप्त पानी प्राप्त हो सकेगा।
उक्ताशय के विषय पर नियम 377 के अधीन लोकसभा के शीतकालीन सत्र में बालाघाट सिवनी सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन ने आसंदी का ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि संसदीय क्षेत्र बालाघाट अंतर्गत सिवनी जिले के संजय सरोवर, अरी, बोरी, सागर, चीचबंद एवं बालाघाट जिले में राजीव सागर, पचामा, नहलेसर्रा सहित अनेक ऐसे जलाशय है जो करीब 50 से 100 वर्ष पुराने है। यह सभी जलाशय और इनकी नहरें रखरखाव एवं मरम्मत के अभाव के कारण जीर्णक्षीर्ण हालत में पहुंच गई है, जिससे पानी के रिसाव की समस्या बनी हुई है और किसानों को सिंचाईं के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। सिंचाई के पानी के अभाव के कारण किसानों की उपज प्रभावित हो रही है और उन्हें नुकसान हो रहा है। डॉ. बिसेन ने आसंदी से आग्रह किया कि किसानों के हित में यदि इन लघु, मध्यम और बड़े जलाशयों की नहरों का सीमेंटीकरण कर दिया जाये तो नहरों से पानी का रिसाव बंद हो जायेगा और टेल क्षेत्र तक के किसानों को सिंचाईं हेतु पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

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