सिवनीमध्यप्रदेश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सिवनी नगर पालिका में सीएमओ विवाद गरमाया, भुगतान रुके तो व्यवस्थाएं लड़खड़ाईं

स्थानांतरण पर रोक के बावजूद कार्यभार और वित्तीय अधिकारों को लेकर टकराव का आरोप, दिशा देहरिया और नगर पालिका अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग

सिवनी नगर पालिका में CMO विवाद गरमाया, हाईकोर्ट आदेश के बाद भी वित्तीय अधिकारों पर टकराव

Seoni 18 August 2026
सिवनी यशो:- नगर पालिका परिषद सिवनी में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के पद को लेकर चल रहा विवाद अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर तक पहुंचने के बाद अवमानना याचिका के रूप में नया मोड़ ले चुका है। हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा 25 जून 2026 को दिए गए अंतरिम आदेश और 3 जुलाई 2026 को अंतरिम राहत जारी रखने के बावजूद याचिकाकर्ता विशाल सिंह मर्सकोले को सीएमओ के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार पूरी तरह नहीं सौंपे गए।

याचिका में तत्कालीन/प्रभारी सीएमओ दिशा देहरिया और नगर पालिका परिषद सिवनी के अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया को अवमाननाकर्ता बनाते हुए न्यायालय के आदेश की कथित जानबूझकर अवहेलना के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दोनों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने, व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित कराने और यह बताने का आग्रह किया है कि उन्हें न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित क्यों न किया जाए।

हालांकि, अवमानना याचिका में लगाए गए आरोप फिलहाल याचिकाकर्ता के दावे हैं। इन आरोपों पर न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से कोई निष्कर्ष दिए जाने की जानकारी उपलब्ध दस्तावेज में नहीं है। इसलिए इन्हें न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

25 जून के आदेश में स्थानांतरण पर लगाई थी रोक

मामले की शुरुआत नगर पालिका परिषद सिवनी के सीएमओ विशाल सिंह मर्सकोले के स्थानांतरण से जुड़ी है। दस्तावेज के अनुसार, उन्होंने 15 जून 2026 और 16 जून 2026 के स्थानांतरण आदेशों को चुनौती देते हुए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में WP-21982/2026 दायर की थी।

25 जून 2026 को न्यायमूर्ति विशाल धगत की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित स्थानांतरण आदेश के याचिकाकर्ता से जुड़े हिस्से को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया था। आदेश में याचिकाकर्ता को नगर पालिका परिषद सिवनी में अपना पद जारी रखने की अनुमति भी दी गई थी।

इसी आदेश को आधार बनाते हुए अवमानना याचिका में दावा किया गया है कि स्थानांतरण आदेश के प्रभाव पर रोक लगने के बाद याचिकाकर्ता की सिवनी में पदस्थापना जारी रहना थी।

3 जुलाई को भी जारी रही अंतरिम राहत

मामले में 3 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए प्रकरण सूचीबद्ध करने के साथ ही कहा कि अगली सुनवाई तक संबंधित प्रतिवादी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि अगली सुनवाई की तारीख तक अंतरिम राहत जारी रहेगी।

याचिकाकर्ता की अवमानना याचिका का प्रमुख आधार यही आदेश है। उनका दावा है कि 25 जून के मूल अंतरिम आदेश को 3 जुलाई के आदेश से समाप्त नहीं किया गया, बल्कि अंतरिम राहत को आगे जारी रखा गया।

कार्यभार संभालने के बाद भी वित्तीय अधिकारों को लेकर विवाद

अवमानना याचिका में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विशाल सिंह मर्सकोले ने सिवनी नगर पालिका में उपस्थित होकर कार्यभार संभालने की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन उन्हें मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में वास्तविक कार्यभार और प्रशासनिक अधिकार प्रदान नहीं किए गए। बताया गया है कि मर्सकोले फिलहाल नगर पालिका के उपस्थिति रजिस्टर में नियमित रूप से हस्ताक्षर कर रहे हैं, जबकि प्रभारी सीएमओ के रूप में पदस्थ दिशा डहेरिया द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कार्यों का संचालन किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार स्थानांतरण पर रोक लगने के बाद उन्हें सिवनी नगर पालिका में सीएमओ के पद पर कार्य करने की अनुमति है। इसके बावजूद उन्हें कार्यालयीन एवं वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाने से आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

याचिका में पत्र क्रमांक 1656 और 1715 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को लेकर मार्गदर्शन प्राप्त करने के नाम पर ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके कारण मर्सकोले अपने पद से जुड़े अधिकारों का प्रभावी रूप से उपयोग नहीं कर सके। इसी स्थिति के चलते उन्होंने नगर पालिका के बैंक खातों से होने वाले भुगतानों पर रोक लगाए जाने की कार्रवाई की है। उनका तर्क है कि यदि न्यायालय के अंतरिम आदेश के अनुसार वे सीएमओ हैं, तो उनके स्थान पर प्रभारी सीएमओ के हस्ताक्षर से वित्तीय भुगतान किया जाना न्यायालय के आदेश की भावना के विपरीत है।

याचिकाकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम को हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कथित अनुपालन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए अवमानना याचिका में आधार बनाया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सुनवाई के बाद ही होगा।

बैंक को भेजे पत्र पर भी सवाल

अवमानना याचिका में 8 जुलाई 2026 के पत्र क्रमांक 1901 का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह पत्र भारतीय स्टेट बैंक को भेजा गया, जिसमें हाईकोर्ट के 3 जुलाई के आदेश की ऐसी व्याख्या की गई, जिसे उन्होंने गलत और भ्रामक बताया है।

याचिका के अनुसार, बैंक को यह संकेत दिया गया कि प्रभारी सीएमओ के रूप में संबंधित अधिकारी की स्थिति बरकरार है और सार्वजनिक भुगतानों को उनके हस्ताक्षर से स्वीकृति दी जाए। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे न्यायालय के आदेश की कथित अवहेलना बताया है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में भुगतान पर रोक का दावा

इस पूरे विवाद का अब सीधा असर नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था पर पड़ने की बात सामने आ रही है। याचिकाकर्ता विशाल सिंह मर्सकोले ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार बैंक में भुगतान संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की बात कही है।

बताया गया है कि दिशा देहरिया के हस्ताक्षर से अब नगर पालिका के खातों से भुगतान नहीं किए जा रहे हैं। सीएमओ पद और वित्तीय अधिकारों को लेकर जारी टकराव के बीच विभिन्न प्रकार के भुगतान अटकने से नगर पालिका की रोजमर्रा की व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी हैं।

कर्मचारियों के भुगतान, ठेकेदारों के लंबित बिल, आवश्यक सेवाओं से जुड़े भुगतान तथा अन्य प्रशासनिक वित्तीय कार्यों पर भी इसका असर पड़ने की स्थिति बन गई है। इस तरह विवाद अब केवल सीएमओ की कुर्सी और प्रशासनिक अधिकारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नगर पालिका के दैनिक कामकाज पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।

अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया की भूमिका पर भी आरोप

अवमानना याचिका में नगर पालिका परिषद सिवनी के अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अध्यक्ष को हाईकोर्ट के आदेश और उनके कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी होने के बावजूद नगर पालिका की आधिकारिक एवं वित्तीय फाइलों को लेकर ऐसी व्यवस्था जारी रखी गई, जिसमें प्रभारी व्यवस्था को बढ़ावा मिला।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमित सीएमओ की मौजूदगी के बावजूद कनिष्ठ पद के अधिकारी के हस्ताक्षर और प्रशासनिक भूमिका को मान्यता देने जैसी कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने इसे नगर पालिका के प्रशासनिक पदानुक्रम और न्यायालय के आदेश दोनों के विपरीत बताया है।

‘व्यक्तिगत सुरक्षा’ को लेकर भी अलग तर्क

याचिका में 3 जुलाई के आदेश में प्रतिवादी क्रमांक 4 के संबंध में दिए गए निर्देश—अगली सुनवाई की तारीख तक संबंधित प्रतिवादी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने—की भी अलग व्याख्या की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह निर्देश संबंधित व्यक्ति को सीमित व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करता है और इसका अर्थ यह नहीं है कि 25 जून को दिए गए स्थानांतरण पर रोक संबंधी मूल अंतरिम आदेश समाप्त हो गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस व्यक्तिगत सुरक्षा को प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

न्यायालय से क्या मांगा गया?

अवमानना याचिका में न्यायालय से मांग की गई है कि—

  • 25 जून 2026 के अंतरिम आदेश की कथित जानबूझकर अवहेलना का संज्ञान लिया जाए।
  • दिशा देहरिया और ज्ञानचंद सनोडिया को अवमानना नोटिस जारी किया जाए।
  • दोनों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया जाए।
  • उनसे पूछा जाए कि न्यायालय की अवमानना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
  • न्यायालय के आदेश की कथित जानबूझकर अवहेलना के लिए कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

याचिका में Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 12 का भी उल्लेख किया गया है।

प्रशासनिक विवाद से अब नगर पालिका का कामकाज प्रभावित

सिवनी नगर पालिका में सीएमओ पद को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अधिकारों को लेकर उत्पन्न गतिरोध के कारण भुगतान अटकने की स्थिति सामने आई है।

यदि भुगतान लंबे समय तक बाधित रहते हैं तो इसका असर नगर पालिका के नियमित संचालन और नागरिक सेवाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में अगली सुनवाई में न केवल अवमानना याचिका के आरोप महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि नगर पालिका की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर न्यायालय की दिशा-निर्देश भी अहम माने जा रहे हैं।

अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर

25 जून के हाईकोर्ट आदेश में याचिकाकर्ता को सिवनी में पद पर बने रहने की अनुमति और 3 जुलाई को अंतरिम राहत जारी रहने के बाद अब अवमानना याचिका में लगाए गए आरोपों पर न्यायालय की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल निर्णायक सवाल यही है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का वास्तविक प्रशासनिक प्रभाव किस प्रकार लागू किया जाना था, संबंधित अधिकारियों ने उसका पालन किस तरह किया और वित्तीय अधिकारों को लेकर उत्पन्न गतिरोध का समाधान कैसे होगा।

इन सभी प्रश्नों पर अंतिम स्थिति न्यायालय की सुनवाई और आगामी आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

सिवनी नगर पालिका में CMO विवाद

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