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साइबर ठगी के 35 लाख रुपये वापस, छपारा पुलिस की बड़ी कामयाबी

2000 किलोमीटर तक पीछा, 100 से अधिक CCTV कैमरों की पड़ताल; उत्तराखंड-उत्तरप्रदेश के फर्जी खातों को कराया होल्ड

छपारा पुलिस ने साइबर फ्रॉड के 35 लाख रुपये वापस दिलाए

Seoni 21 September 2026
सिवनी/छपारा यशो:-
साइबर ठगी के एक मामले में छपारा पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए ठगी गई 35 लाख रुपये की पूरी राशि प्रार्थी को वापस दिलाई है। पुलिस टीम ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए करीब 2000 किलोमीटर का सफर तय किया और 100 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी जांच में सामने आए उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के संदिग्ध बैंक खातों को संबंधित बैंकों के माध्यम से होल्ड कराया गया और रकम की निकासी पर रोक लगाई गई। आवश्यक बैंकिंग एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी 35 लाख रुपये की राशि प्रार्थी के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करा दी गई।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सिवनी श्री कृष्ण लालचंदानी (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक मिश्रा तथा एसडीओपी लखनादौन श्री अपूर्व भलावी के नेतृत्व में थाना छपारा पुलिस द्वारा की गई।

100 टन सुपारी के सौदे में फंसे 35 लाख रुपये

घटना के संबंध में पुलिस ने बताया कि 27 जुलाई 2026 को प्रार्थी वैभव शिवहरे ने थाना छपारा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रार्थी इंटरनेशनल एक्सपोर्ट का काम करता है और उसे बांग्लादेश से 100 टन सुपारी का ऑर्डर प्राप्त हुआ था।

ऑर्डर की सप्लाई के लिए प्रार्थी ने ऑनलाइन स्थानीय व्यापारियों से संपर्क किया। इसी दौरान सांगली, महाराष्ट्र की बालाजी ट्रेडर्स नामक कंपनी से 100 टन सुपारी की 2 करोड़ रुपये में उपलब्धता का सौदा तय हुआ। सौदे के तहत प्रार्थी ने संबंधित व्यापारी के खाते में 35 लाख रुपये एडवांस के रूप में जमा कर दिए।

इसके बाद जब प्रार्थी सुपारी का सैंपल देखने सांगली महाराष्ट्र पहुंचा, तब उसे पता चला कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बालाजी ट्रेडर्स के नाम का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर उसके साथ 35 लाख रुपये की ठगी की है।

प्रार्थी की शिकायत पर थाना छपारा में अपराध क्रमांक 326/26, धारा 318(4), 319(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

एक खाते से दूसरे खातों में भेजी जा रही थी ठगी की रकम

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बैंक खातों में हुए लेन-देन की जानकारी जुटाई।

जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को आरोपियों द्वारा एक बैंक खाते से दूसरे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। तकनीकी जांच के दौरान ऐसे संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी सामने आई, जो उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में संचालित हो रहे थे।

पुलिस टीम ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और संदिग्धों तथा उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे खातों की जानकारी जुटाने के लिए उत्तराखंड एवं उत्तरप्रदेश पहुंचकर कार्रवाई की।

2000 किलोमीटर का सफर और 100 से ज्यादा CCTV खंगाले

पुलिस टीम ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए करीब 2000 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर लगे 100 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की गई। तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज और बैंकिंग लेन-देन से संबंधित जानकारी को आपस में जोड़ते हुए पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।

जांच के दौरान सामने आए संदिग्ध बैंक खातों के संबंध में पुलिस ने संबंधित बैंकों से संपर्क किया और आवश्यक नोटिस एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर खातों में जमा रकम को होल्ड कराया। साथ ही रकम की निकासी पर रोक लगवाई गई।

पूरी 35 लाख रुपये की रकम प्रार्थी को वापस

पुलिस की कार्रवाई से ठगी की गई पूरी 35 लाख रुपये की राशि सुरक्षित कर ली गई। बैंक से आवश्यक पत्राचार एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद होल्ड कराई गई संपूर्ण राशि प्रार्थी वैभव शिवहरे के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर कराने में पुलिस को सफलता मिली।

साइबर ठगी के मामले में रकम को समय रहते होल्ड कराकर पीड़ित को पूरी राशि वापस दिलाना पुलिस कार्रवाई की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

उक्त कार्रवाई में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस लखनादौन श्री अपूर्व भलावी, थाना प्रभारी छपारा निरीक्षक श्री खेमेन्द्र कुमार जैतवार, उप निरीक्षक मुकेश डेहरिया, उप निरीक्षक भुजवल सिंह प्रजापति, प्रधान आरक्षक मूलसिंह उइके, आरक्षक विनय सेंगर, आरक्षक सूरज गिरारे, साइबर सेल प्रभारी सउनि देवेन्द्र जायसवाल एवं साइबर सेल प्रधान आरक्षक अजय बघेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस की इस कार्रवाई में तकनीकी जांच, बैंकिंग ट्रांजेक्शन की निगरानी, CCTV फुटेज की पड़ताल और समय पर बैंक खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रही, जिसके परिणामस्वरूप प्रार्थी को उसकी 35 लाख रुपये की पूरी राशि वापस मिल सकी।

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