छिंदवाड़ा जहरीली कफ सिरप त्रासदी: 22 मासूमों की मौत पर कांग्रेस का सख्त विरोध, दोषियों को कड़ी सजा की मांग
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीली कफ़ सिरप से 22 बच्चों की असमय मौत ने राज्य को झकझोर दिया। कांग्रेस ने दोषियों को तत्काल सजा देने और स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की।

Mandla18 October 2025:
मंडला यशो:- मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 22 मासूमों की मौत ने पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया है। जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियाँ गूँजती थीं, अब मातम, रूदन और आंसू हैं। यह घटना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और दवा माफिया की सांठगांठ का सबूत है।
इस त्रासदी का दर्द महसूस करते हुए मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने परासिया के शोकाकुल परिवारों से मिलकर उनके आंसू पोंछे। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रति संवेदनशीलता का वास्तविक परिचायक था।
जिला कांग्रेस कमेटी मंडला द्वारा आयोजित एक दिवसीय अनशन में मासूमों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर डॉ. अशोक मर्सकोले ने कहा,
“यह केवल छिंदवाड़ा की त्रासदी नहीं, पूरे मध्यप्रदेश की विफलता का प्रतीक है। असली अपराध डॉक्टरों में नहीं, बल्कि शासन तंत्र में है, जो अमानक दवाओं और भ्रष्टाचार को जीवन से बड़ा मानता है।”
कांग्रेस की मांगें
कांग्रेस ने इस घटना को लेकर चार सूत्रीय मांगें रखी हैं:
1. दोषी दवा निर्माता कंपनियों, वितरकों, अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ हत्या के मुकदमे की शुरुआत।
2. स्वास्थ्य मंत्री की तत्काल बर्खास्तगी।
3. पीड़ित परिवारों को न्यूनतम 01 करोड़ रुपए मुआवजा और बच्चों के दीर्घकालिक इलाज की जिम्मेदारी सरकार।
4. निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए SIT का गठन।
विपक्ष की सख्त प्रतिक्रिया
डॉ. अशोक मर्सकोले ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री को सीधे जिम्मेदार ठहराया और कहा,
“अगर मुख्यमंत्री संवेदनशील होते, तो स्वास्थ्य मंत्री आज पद पर नहीं होते। सीएम डॉक्टरों पर अपराध दर्ज करवा रहे हैं, जबकि असली अपराध उनके शासन के भीतर है।”
कांग्रेस ने इस त्रासदी को सिर्फ विरोध का मामला नहीं,
बल्कि जन-जवाबदेही का मुद्दा बताया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि
यह आंदोलन राजनीति नहीं, बल्कि जिले के भविष्य का सवाल है।
जनसंवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण
छिंदवाड़ा क्षेत्र के राजनीतिक परंपरा के अनुसार, यह दौरा कमलनाथ-नकुलनाथ परिवार की संवेदनशील राजनीति का निर्वहन माना गया।
पटवारी ने कहा,
“भले ही भाजपा सांसद अपने क्षेत्र के दुख को देखने तक नहीं आते,
लेकिन कांग्रेस हमेशा जनता के साथ खड़ी रहती है।”
अनशन और दौरे के बाद पटवारी ने तत्काल नागपुर अस्पताल में भर्ती बच्चों से मुलाकात कर जन-जवाबदेही का वास्तविक संदेश दिया।



