मामला और धाराएँ
मामला थाना कोतवाली सिवनी के अपराध क्रमांक 899/2025 से संबंधित है, जो धारा 121(1), 132, 221, 296, 324(4), 351(3), 191(2) भारतीय न्याय संहिता (भा.न्या.सं.) के तहत पंजीबद्ध है।एफआईआर एवं सह-अभियुक्तों के नाम
थाना कोतवाली सिवनी द्वारा प्राप्त लिखित रिपोर्ट के आधार पर ब्रजेश राजपूत सहित निम्नलिखित सह-अभियुक्तों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया—- योगेश राजपूत
- नरेन्द्र ठाकुर
- अखिलेश खेड़ीकर
- ओमप्रकाश (उर्फ मुन्ना) महाराज
- कुलदीप ठाकुर
- अजय ठाकरे
- ब्रजेश राजपूत (आवेदक)
पृष्ठभूमि और आरोप
अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, दिनांक 19 अक्टूबर 2025 को थाना नवेगांव, जिला बालाघाट में पदस्थ उपनिरीक्षक अमित अग्रवाल ने थाना कोतवाली सिवनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 13(1)(ए), 13(2) के तहत गठित एसआईटी टीम के सदस्य हैं और थाना बालाघाट के अपराध क्रमांक 628/25 की विवेचना में सहयोग हेतु योगेश राजपूत के घर पहुंचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ के दौरान योगेश राजपूत (जो पुलिस प्रधान आरक्षक हैं) ने आसपास के लोगों को बुला लिया। मौके पर भारी भीड़ एकत्र हुई, जिसमें ब्रजेश राजपूत और नरेन्द्र ठाकुर सहित अन्य लोगों ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। घटना के दौरान शासकीय सेवक के साथ मारपीट, धमकी और मोबाइल तोड़ने जैसी घटनाएं हुईं।अभियुक्त पक्ष के तर्क
अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता वीरेन्द्र सोनकेशरिया उपस्थित हुए और कहा कि —- आवेदक को विभागीय प्रतिशोधवश झूठा फंसाया गया है।
- वास्तविक अभियुक्त उनके भाई योगेश राजपूत हैं, जिन्होंने 2024 में विभागीय दंड के खिलाफ उच्च न्यायालय में रिट दायर की थी।
- एफआईआर की वीडियोग्राफी में आवेदक द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसक हरकत नहीं दिखती।
- सभी धाराओं में सजा सात वर्ष से कम है और मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा विचारणीय है।