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📰 पुलिस आरक्षक योगेश राजपूत लापता: DIG और शराब ठेकेदार पर गंभीर आरोप

सिवनी–बालाघाट पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

इन दिनों पुलिस विभाग के लिए परिस्थितियाँ अत्यंत प्रतिकूल हैं। प्रदेशभर में सुर्खियों में आए हवाला राशि लूटकांड, रिश्वत प्रकरण, और अब मालखाना चोरी मामला ने पुलिस की साख को गहरा झटका दिया है। जहाँ हवाला कांड में एसडीओपी पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मी जेल पहुँच चुके हैं, वहीं दो पुलिसकर्मी रिश्वत मामले में निलंबित हो चुके हैं। अब मालखाना चोरी और एक आरक्षक के लापता होने की घटना ने विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

Seoni, October 21, 2025
सिवनी यशो:- जिले में पदस्थ पुलिस आरक्षक योगेश राजपूत अचानक लापता हो गया है। लापता होने से पहले उसने एक पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए ।इस पत्र की भाषा और भाव देखकर कई लोगों का कहना है कि – यह सुसाइड नोट से कम नहीं लगती।

परिजनों ने इस संबंध में कोतवाली थाना सिवनी में शिकायत दर्ज कराई है,  वहीं पुलिस अपने आरक्षक की तलाश में जुटी है।

🔶 डीआईजी और शराब ठेकेदार पर झूठे मामले में फंसाने का आरोप

आरक्षक योगेश राजपूत ने अपने पत्र में छिंदवाड़ा जोन के डीआईजी राकेश सिंह और शराब ठेकेदार संजय भारद्वाज पर झूठे प्रकरण में फंसाने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में बालाघाट पुलिस योगेश राजपूत के घर नोटिस लेकर पहुँची थी।
बालाघाट कोतवाली के मालखाने से लाखों रुपये और जेवर चोरी के मामले की जांच के दौरान बालाघाट पुलिस और योगेश राजपूत के बीच तीखी बहस और विवाद हुआ था।

🔶 मालखाना से 65 लाख गायब, विवाद में फंसे योगेश राजपूत

बालाघाट कोतवाली के मालखाने से करीब 55 लाख रुपये नगद और 10 लाख रुपये के जेवर चोरी का खुलासा तब हुआ जब एक महिला फरियादी अदालत से अनुमति लेकर अपनी रकम लेने पहुँची।
थाना प्रभारी ने जब प्रधान आरक्षक राजीव पंद्रे को रकम लाने कहा, तो उसने भीतर से गेट बंद कर फांसी लगाने का प्रयास किया, जिसे समय रहते बचा लिया गया।
जांच में सामने आया कि वह डेढ़ वर्ष से चोरी कर रहा था और रकम को जुए में हार जाता था।
बालाघाट आईजी संजय सिंह ने इस पूरे प्रकरण की पुष्टि की है।
इस प्रकरण में योगेश राजपूत का नाम आने से विवाद और अधिक गंभीर हो गया है।

🔶 सिवनी में छापा, विवाद और वीडियो वायरल

बालाघाट पुलिस टीम शनिवार रात सिवनी पहुँची और प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत से पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
सूत्रों के अनुसार, योगेश राजपूत ने अपने समर्थन में स्थानीय भाजपा नेताओं और अपने भाई ब्रजेश राजपूत (जिस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं) को बुला लिया।
स्थिति बिगड़ने पर बालाघाट पुलिस को बिना कार्रवाई लौटना पड़ा।
पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हुआ और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इस घटना के बाद सिवनी कोतवाली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं,

कि थाना प्रभारी किशोर बामनकर पर सहयोग न करने के आरोप लगे हैं।

🔶 संदिग्ध कार्यप्रणाली और ट्रांसफर विवाद

सूत्र बताते हैं कि-

प्रधान आरक्षक योगेश राजपूत की अनेक विवादो में संलिप्तता होने के संदेह और

शिकायत के आधार पर स्थानांतरण किये गये थे ।

पिछले कुछ दिनों पूर्व योगेश राजपूत के संबंध में पुलिस के एक अधिकारी की टिप्पणी भी चर्चा में रही है ।

बालाघाट पुलिस मालखाना विवाद से जुड़े मामले में सट्टा-जुआ संचालकों से संबंध होने का आरोप है ।

पहले भी अनेक शिकायतो पर उनका आईजी जबलपुर द्वारा तबादला नरसिंहपुर किया गया था,

परंतु उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे आदेश प्राप्त कर लिया था।

🔶 जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

लगातार सामने आ रहे इन प्रकरणों ने पुलिस विभाग की विश्वसनीयता और

नैतिकता दोनों पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की गलती नहीं

बल्कि प्रशासनिक अनुशासनहीनता और तंत्र की शिथिलता का परिणाम है।

पुलिस विभाग नैतिकता और चरित्र के संकट से जूझ रहा है,

जबकि प्रकरणों में सच्चाई और षड्यंत्र की परतें अभी पूरी तरह खुलनी बाकी हैं।

यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई,

तो यह घटनाएँ जनविश्वास को पूरी तरह डगमगा सकती हैं।

योगेश राजपूत द्वारा लिखा गया पत्र
योगेश राजपूत द्वारा लिखा गया पत्र

https://navbharattimes.indiatimes.com/epaper/2025/oct/october18/indore-liquor-contractor-accused-of-attacking-and-shooting-youths-police-register-case/articleshow/124644712.cms

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