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श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन

वृंदावन से आए कलाकारों ने मंत्र मुग्ध करने वाला किया प्रदर्शन

श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन - Seoni News

छपारा यशो:- बैनगंगा नदी तट पर जारी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। इस मौके पर बरसाने से पधारे कथावाचक कन्हैया महाराज ने संगीतमय कथा वाचन कर भगवान की बाल लीलाओं के चरित्र का वर्णन किया और श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होता है, अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है, इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की,जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है,राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, परंतु भगवान उसका वध कर देते हैं। इसी प्रकार कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं, परंतु भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं और गोवर्धन की पूजा करने के लिए कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं और गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं। इसे देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देखकर भगवान कृष्ण कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी लोगों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। मथुरा को कंस के आतंक से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। इस तरह भगवान श्री कृष्ण की अनेक बाल लीलाओं का वर्णन कन्हैया महाराज द्वारा किया गया।
ज्ञात हो कि आठ जनवरी से बैनगंगा नदी तट पर जारी उक्त सार्वजनिक भागवत कथा में दिन प्रति दिन श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती ही जा रही है वही बरसाने से पधारे कन्हैया महाराज की कथा सुनाने की आकर्षक शैली के चलते दर्शक लगातार तीन घंटे मंत्र मुग्ध हो कर कथा सुनते हैं, वही वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा बहुत ही मनमोहक प्रस्तुति दी गई जिसे देखकर दर्शक भी अपनी जगह से उठकर नृत्य करने को मजबूर हो गए।मौके पर मुख्य यजमान सहित दर्जनों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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