छिंदवाड़ामध्यप्रदेशव्यापार

एमआरपी से अधिक दामों पर बिक रही है देसी, विदेशी शराब

ठेकेदारों ने एक निब में बढ़ाएं 20 से 25 प्रतिशत

छिंदवाड़ा 0७ अप्रैल 2025
छिंदवाड़ा यशो:- जिले में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही शराब के ठेकों का पुनर्वितरण हुआ है। हालांकि चेहरे वही पुराने हैं, पर एरिया में बदलाव हुआ है। इसी के साथ ही एक नया ‘सिंडिकेट सिस्टमÓ भी सामने आया है, जहां ठेकेदारों ने आपसी साठगांठ कर शराब कारोबार को मनमानी तरीके से संचालित करना शुरू कर दिया है। शहर भर और जिले में संचालित एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है, जिससे शराबप्रेमियों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। शासन द्वारा तय न्यूनतम और अधिकतम मूल्य की अनदेखी करते हुए ठेकेदार मनचाहा रेट वसूल रहे हैं। नियमानुसार किसी भी सूरत में शराब की बिक्री निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक पर नहीं होनी चाहिए, लेकिन जिले में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

शिकायतें मिल रही हैं कि प्लेन शराब, जिसकी अधिकतम कीमत 75 रुपए पाव तय है, उसे 100 रुपए में बेचा जा रहा है। मसाला शराब का अधिकतम मूल्य 106 रुपए होते हुए भी उसे 120 रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं, 150 रुपए एमआरपी वाली पावर बियर 200 रुपए तक में बिक रही है।
इस ओवररेटिंग से परेशान होकरगरीब और निम्न वर्ग के लोग अब मिलावटी और गुणवत्ताहीन महुआ या कच्ची शराब की ओर रुख कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है।

अंग्रेजी शराब भी एमआरपी से अधिक दाम पर बिक रही

जिले में सिर्फ देसी ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी शराब भी निर्धारित अधिकतम मूल्य एमआरपी से ज्यादा कीमत पर बेची जा रही है। हर ब्रांड की शराब पर 20 से 25 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी जेब ढीली करनी पड़ रही है। शराब दुकानों पर एमआरपी के ऊपर अतिरिक्त राशि वसूलना आम बात हो गई है, लेकिन इस अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन है। शराब विक्रेताओं द्वारा खुलेआम शासन के नियमों की अवहेलना की जा रही है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।ग्राहकों का कहना है कि शराब की बोतलों पर स्पष्ट रूप से मूल्य अंकित होता है, लेकिन दुकानदार उसी बोतल को ज्यादा दाम में बेच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, जिसकी एमआरपी 650 रुपये है, वह बोतल 670 से 700 रुपये तक में बेची जा रही है।शराब कारोबार में मचे इस अव्यवस्था के पीछे ठेकेदारों का आपसी साठगांठ वाला ‘सिंडिकेटÓ माना जा रहा है, जो पूरे जिले में मनमानी कीमतों पर शराब बेच रहा है। इस लूट को रोकने के लिए विभागीय सख्ती बेहद जरूरी है, लेकिन फिलहाल प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।जनता ने मांग की है कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग तुरंत कार्रवाई करें और शराब बिक्री को एमआरपी के अनुसार नियमित किया जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

प्रशासन को चाहिए कि इस पूरे सिंडिकेट सिस्टम की जांच कर कठोर कार्रवाई करे, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और शासन के नियमों का पालन सुनिश्चित हो।

Dainikyashonnati

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