मध्यप्रदेशमंडला

भैंसादाह वनग्राम में नाली निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा

भैंसादाह वनग्राम में नाली निर्माण चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट

अधूरा काम, तय राशि से अधिक भुगतान, एक ही बिल कई बार अपलोड

मंडला यशो :-
मंडला जिला लगातार भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। ग्राम पंचायत स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला ग्राम पंचायत घाघा के वनग्राम भैंसादाह से उजागर हुआ है, जहां नाली निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

भैंसादाह वनग्राम में अधूरा नाली निर्माण कार्य, भ्रष्टाचार के आरोप
भैंसादाह वनग्राम में अधूरा नाली निर्माण, तय राशि से अधिक भुगतान के आरोप

जहां से नापी गई नाली, वहां तक बना ही नहीं निर्माण

ग्रामीणों के अनुसार नाली निर्माण कार्य अवध राम के घर से लक्ष्मण परते के घर तक प्रस्तावित था, लेकिन वास्तविकता में यह निर्माण विनोद के घर पर ही समाप्त कर दिया गया।

ग्रामीण लक्ष्मण परते ने बताया कि उनका घर सड़क के अंतिम छोर पर और नीचे की ओर स्थित है, जहां बारिश के समय पानी भर जाता है। नाली उनके घर तक नहीं पहुंचने से जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नाली की नाप अवध राम के घर के सामने बने चैंबर से की गई, जबकि वहां तक नाली का निर्माण हुआ ही नहीं। जब इस संबंध में सरपंच और सचिव से सवाल किए गए तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

3.20 लाख की स्वीकृति, पोर्टल पर 5 लाख से अधिक का भुगतान

दस्तावेजों के अनुसार नाली निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 3 लाख 20 हजार रुपये थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद पोर्टल पर 5 लाख रुपये से अधिक के बिल दर्शाए गए हैं।

यह सवाल बेहद गंभीर है कि जब निर्माण पूरा ही नहीं हुआ तो तय राशि से अधिक भुगतान कैसे कर दिया गया?

एक ही फर्म का एक ही बिल, कई बार किया गया अपलोड

ग्रामीणों का आरोप है कि पोर्टल पर जो बिल लगाए गए हैं, वे अधिकांश निर्माण सामग्री से संबंधित हैं, जबकि मजदूरों को आज तक भुगतान नहीं किया गया है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि एक ही फर्म का एक ही क्रमांक वाला बिल, अलग-अलग भुगतान प्रविष्टियों में कई बार अपलोड किया गया है। वहीं जिन सामग्रियों के बिल दर्शाए गए हैं, उनकी निर्माण स्थल पर उपलब्धता भी संदेह के घेरे में है।

गुणवत्ताहीन निर्माण, तकनीकी मानकों की अनदेखी

ग्रामीणों द्वारा नाली निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि इंजीनियर द्वारा लोहे की सरिया एक फिट की दूरी पर लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ठेकेदार द्वारा एक मीटर की दूरी पर सरिया डालकर सामग्री की बचत की गई।

स्थल निरीक्षण में यह भी सामने आया कि नाली का उपयोग किसी भी घर के शौचालय से नहीं हो रहा है, जबकि गांव को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा पहले बनाए गए सूखा–गीला कचरा प्रबंधन केंद्र भी वर्तमान में जर्जर स्थिति में पड़े हैं।

सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त दावों पर सवाल

यह पूरा मामला शासन–प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, फर्जी बिलों की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।

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