शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ दुर्व्यवहार का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ दुर्व्यवहार का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
दिनांक : 21 जनवरी 2026
सिवनी यशो :- प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर
शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती स्वामी जी एवं उनके शिष्यों के साथ कथित
दुर्व्यवहार, मारपीट और अपमानजनक आचरण को लेकर देशभर में आक्रोश व्याप्त है। इसी कड़ी में सिवनी जिले में
राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से सौंपा गया।

सनातन समाज आहत, साधु-संतों की मर्यादा पर सीधा प्रहार
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि –
परम पूज्य शंकराचार्य जी सनातन धर्म के प्रतिष्ठित धर्मगुरु,
राष्ट्रव्यापी सम्मान प्राप्त संत एवं समाज को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देने वाले महान व्यक्तित्व हैं।
प्रयागराज माघ मेले के दौरान उनके साथ तथा उनके शिष्यों के साथ जिस प्रकार का
अमर्यादित,
अपमानजनक एवं
हिंसक व्यवहार किया गया, उससे संपूर्ण सनातन समाज
अत्यंत आहत एवं क्षुब्ध है।
धक्का-मुक्की, मारपीट और अभद्रता के गंभीर आरोप
ज्ञापन के अनुसार, घटना के दौरान शंकराचार्य जी के शिष्यों के साथ
धक्का-मुक्की, मारपीट, वस्त्र खींचने, चोटी/शिखा खींचने, अभद्र भाषा के प्रयोग
एवं शारीरिक उत्पीड़न जैसी घटनाएँ सामने आईं।
यह आचरण न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि साधु-संतों की मर्यादा,
धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया
ज्ञापन में इसे भारतीय संविधान के
अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता),
21 (जीवन एवं गरिमा का अधिकार) तथा 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का
स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है।
यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों अथवा जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने
अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु को जानबूझकर अपमानित करने का प्रयास किया।
राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगें
- घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
- भविष्य में संतों और धर्मगुरुओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों।
- शंकराचार्य जी एवं उनके अनुयायियों की गरिमा और सुरक्षा की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जाए।
धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मामला
ज्ञापन में कहा गया कि यह विषय केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि
देश की धार्मिक सहिष्णुता, संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा
अत्यंत गंभीर विषय है।
ज्ञापन सौंपने वालों ने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए
दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं न्यायोचित कार्रवाई के निर्देश देंगे।




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