विगत दो वर्षों से मांग के अनुरूप किसानों को नहीं मिल रही 18-46 डीएपी, खाद, खाद के अभाव में फसलों का उत्पादन लगातार हो रहा प्रभावित, किसानों को होगा आर्थिक नुकसान
Chhindwara 23 May 2025
छिंदवाड़ा यशो:- भाजपा की सरकार में जिले का किसान हर स्तर पर परेशान है। कभी बिजली के बढ़े हुए बिलों से त्रस्त है तो कभी मौसम की मार झेल रहा। सरकार से मदद की बजाए केवल कोरे आश्वासन मिल रहे। जिले के राजनैतिक जिम्मेदार व प्रशासनिक अफसरों को किसानों की मूल समस्याएं नजर नहीं आ रही। फसलों की अच्छी उपज के लिए जो खाद चाहिए उसकी कमी लगातार बनी हुई है। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से निश्चित तौर पर फसलों की उपज बुरी तरह प्रभावित होगी जिसके लिए सिर्फ और सिर्फ भाजपा की सरकार जिम्मेदार होगी। उक्त उदगार किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र चौधरी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से डीएपी की किल्लत पर व्यक्त किए हैं।
पुष्पेन्द्र चौधरी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में किसान हितैषी बनने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केन्द्र के कृषि मंत्री को घेरते हुए कहा कि छिन्दवाड़ा जिला मुख्यत: कृषि प्रधान जिला है। यहां की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। किसानों की आय से ही यहां के हाट बाजार से लेकर अन्य व्यवसाय संचालित होते हैं। यही नहीं देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। इन सम्पूर्ण तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए यह आवश्यक है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में वह खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिससे फसलों का उत्पादन अच्छा हो, किन्तु विगत दो वर्षों से छिन्दवाड़ा के किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं दी जा रही है।
भाजपा सरकार का नहीं किसानों पर ध्यान
किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आगे कहा कि मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ के कार्यकाल में किसानों को कभी भी खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। खरीफ अथवा रबी मौसम के पूर्व ही नेताद्वय के प्रयासों से जिले की प्रत्येक सहकारी सोसाइटियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हुआ करती थी और किसानों को नकद में नजदीकी सोसाइटी से सुलभता के साथ खाद मिल जाती थी, किन्तु भाजपा की सरकार में खाद ही उपलब्ध नहीं है, जहां है वहां नकदी में नहीं मिल रही। 20 किमी से अधिक का सफर तय कर सोसाइटी पहुंचने के बाद किसान खाली हाथ लौट रहा है। चांद, चौरई, अमरवाड़ा, छिन्दवाड़ा, मोहखेड़, उमरेठ, जामई व परासिया सहित अन्य क्षेत्र के किसान सोसाइटी से खाली हाथ लौट रहे हैं।



